तनाव का जमाना,मनोशारीरिक स्वास्थ्य पर निशाना

विश्व स्वास्थ्य दिवस -7 अप्रैल : विशेष शोध रिपोर्ट

तन की सेहत पर राज है मन का।

 शरीर हमारे मनोभावों के प्रति  बहुत  ही संवेदनशील है। शरीर और मन के इस गहरे सम्बन्ध का खुलासा जिला चिकित्सालय के किशोर मित्र क्लिनिक व मनदर्शन मिशन द्वारा किये गये डाक्यूमेन्ट्री रिसर्च के बाद सामने आया है।  विश्व स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर किशोर मनोपरामर्श दाता डा. आलोक मनदर्शन के अनुसार मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक है ।शरीर यदि हार्डवेयर है तो मन है सॉफ्टवेअर ।अंग्रेजी भाषा के अनेक शब्द जैसे हार्ट

डा. आलोक मनदर्शन
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ब्रेक,हार्ट एक, हैवी हार्टेड तथा हिन्दी के शब्द जैसे दिल टूटना, दिल बैठना आदि हमारे मनों भावों के प्रति शरीरकी संवेदनशीलता को व्यक्त करता है। 300 वर्ष पूर्व विलयम हार्वे के अनुसार मन के प्रत्येक भाव पीड़ा, तनाव, सुख, आनन्द, भय,क्रोध, चिंता, द्वन्द व कुंठा आदि का सीधा प्रभाव हमारे शरीर पर पड़ता है।इस दुष्प्रभाव को साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर या मनोशारीरिक रुग्णता कहा जाता है ।

लेकिन मनोजागरूकता के अभाव तथा मनोतनाव या अवसाद के प्रति व्याप्त  हिचक के कारण  मनोशारीरिक बीमारिओ को केवल शारीरिक बीमारी मान कर सम्यक व सटीक इलाज से लोग वंचित रह जाते है, औऱ बार बार बीमारी के भिन्न भिन्न रूपों में इलाज करवाते फिरते है,क्योंकि मनोशरीरिक बीमारी के मूल में स्थित मनोगतिकीय पहलू छुटे रह जाते है।
मनोशारीरिक लक्षण: पेट का लगातार खराब रहना, भूख व निद्रा में कमी,टेंशन हेडेक,हाई ब्लड प्रेशर, शुुगर लेवल नियंत्रित न होना, दिल की धड़कन तेज होना, दिल पे भारीपन व अन्य असामान्य लक्षण महसूस होना – नॉन कार्डियक चेस्ट सिंड्रोम, मनोशरीरिक थकान,आलस्य,  कंवर्जन डिओर्डर, स्ट्रेस जनित एलर्जी व सांस संबधित दिक्कते व अन्य तमाम डिसआर्डर ।

बचाव व उपचार :

डॉ मनदर्शन के अनुसार साइकोसोमैटिक डिसर्डर से बचाव व सम्यक उपचार के लिए लोगो मे मनोस्वस्थ्य के प्रति जागरूक होना पड़ेगा और अपने चिकित्सक से किसी भी प्रकार के मनोतनाव व अवसाद की मनोदशा से निःसंकोच अवगत कराएं । दैनिक क्रिया-कलाप से उत्पन्न दबाव व तनाव को अपने मन पर हाबी न होने दें। मनोरंजक गतिविधियों तथा मन को शुकून व शांति प्रदान करने वाले ध्यान व विश्राम को प्राथमिकता दें। आठ घन्टे की गहरी नींद अवश्य लें। काग्निटिव-बिहैवियर मनोज्ञान के माध्यम से मन पर तनाव के हाबी होने से काफी हद तक बचा जा सकता है तथा आनन्दित व शांत मनोदशा के सकारात्मक मनोंप्रभाव से शरीर की सेहत भी संवारी जा सकती है।

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