इम्पल्स कंट्रोल डिसऑर्डर से युवा हो रहे “एंग्री यंग सिंड्रोम” का शिकार : डा. आलोक मनदर्शन

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विश्व मनोस्वास्थ्य दिवस 10 अक्टूबर “युवा मनोस्वास्थ्य” विशेष रिसर्च रिपोर्ट

👉दो तिहाई युवा ग्रषित है इम्पल्स कंट्रोल डिसऑर्डर-(आई सी डी ) से 

👉युवाओ में बढ़ता अवसाद,उन्माद,पैरानोइया, जैसे मनोरोग बन रहे बानगी

10 अकटूबर को पूरी दुनिया विश्व मनोस्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाने को बाध्य हो चुकी है क्योंकि आज मनोरोग पूरी दुनिया मे महामारी का रूप ले चुका है।वर्ष 2018 के लिये फोकस थीम है “यूथ मेन्टल हेल्थ” । वैसे तो पहला वर्ल्ड मेन्टल हेल्थ डे 1992 में मनाया गया था , लेकिन तब से अब तक मनोरोगों से ग्रषित लोगों में सबसे ज्यादा गंभीर आयु वर्ग युवाओं के रूप में उभर कर सामने आये है और भारत तो इस मनोसमस्या की राजधानी के रूप में उभर कर आ चुका है ।यह फोकस ग्रुप इसलिए और भी मायने रखता है क्योंकि आज का मनोरुग्ण युवा ही कल का भविष्य है ।हमारे देश के युवक व युवतियों और उनमें मौजूद आई सी डी यानी इम्पल्स कंट्रोल डिसऑर्डर के इस गहरे सहसम्बन्ध का खुलासा ज़िला चिकित्सालय के डॉ मनदर्शन द्वारा किये गये डाक्यूमेन्ट्री रिसर्च के बाद सामने आया है। यह विचार विश्व मनोस्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर मनकक्ष के युवा व किशोर विशेष  मनोपरामर्शदाता  डा. आलोक मनदर्शन ने व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि  रुग्ण व तीव्र नकारात्मक मनोभावो जैसे एंगर,एंग्जाइटी एवं एंग्विश शब्दों की व्युत्पत्ति ग्रीक शब्द‘‘एंज’’ से हुई है, जिसका तात्पर्य तेज मानसिक दबाव या तीव्र मनोवेग से लिया जाता है। जब हम इन तीव्र रुग्ण मनोवेगों को आत्म नियंत्रित करने की क्षमता खोने लगतें है तो हम आई सी डी के शिकार हो जातें है और फिर यही डिसऑर्डर युवक व युवतियों को “एंग्री यंग सिंड्रोम” में जकड़कर कई गम्भीर मनोरोगों जैसे अवसाद, उन्माद, पैरानोइया आदि की तरफ ले जा सकता है जिसकी परिणति हिंसा, अपराध, आत्महत्या, परहत्या,नशाखोरी , आक्रमकता व अन्य असामाजिक, अनैतिक अमानवीय कृत्यों में हो सकती है।

👉साइकोथेरपी के चार प्रमुख चरण :

 मनोरूग्ण युवक व युवती को प्रथम चरण में मेन्टल कैथार्सिस का अवसर दिया जाता है, जिससे वह अपनी दमित भावनाओं को खुल कर अभिव्यक्त कर सके।दूसरे चरण में सपोर्टिव तकनीक का प्रयोग करते हुए आत्मविश्वास विकसित किया जाता है ।तीसरे चरण में उसकी अंतर्दृष्टि का विकास काउंटर प्रोजेक्टिव तरीके से किया जाता है तथा अंतिम चरण में रियलिटी ओरिएंटेशन तथा स्ट्रेस कोपिंग कैपेसिटी का विकास किया जाता है।

👉बचाव व उपचार :

इसके बचाव के लिए उन्होने बताया कि दैनिक क्रिया-कलाप से उत्पन्न दबाव व तनाव को अपने मन पर हाबी न होने दें। मनोरंजक गतिविधियों तथा मन को शुकून व शांति प्रदान करने वाले ध्यान व विश्राम को प्राथमिकता दें। आठ घन्टे की गहरी नींद अवश्य लें। काग्निटिव-बिहैवियर मनोज्ञान के माध्यम से मन पर तनाव के हाबी होने से काफी हद तक बचा जा सकता है तथा वर्चुअल एक्सपोज़र व डिसेंसिटाइजेशन तकनीक से इम्पल्स कंट्रोल डिसऑर्डर को उदासीन किया जाता है।
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