पांचवें चरण में यूपी में होगा ऐतिहासिक मुकाबला

6 मई को यूपी की 14 लोकसभा सीटों पर होगा मतदान

ब्यूरो। लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में यूपी में ऐतिहासिक मुकाबला होगा। 6 मई को यूपी की 14 लोकसभा सीटों पर मतदान होगा इन 14 सीटों में से 12 सीटें भाजपा के कब्जे में हैं जबकि केवल दो सीटें कांग्रेस के पाले में हैं। लेकिन सपा-बसपा का महागठबंधन होने के बाद यूपी का सियासी समीकरण और पेचीदा हो गया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में 14 सीटों पर सपा-बसपा के प्रत्याशी दूसरे या तीसरे नंबर पर रहे थे लेकिन दोनों के वोट मिला दिए जाएं तो वो कई सीटों पर भारी पड़ते दिखते हैं। करते हैं 10 ऐसी सीटों की पड़ताल जहां इस बार मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
फतेहपुर लोकसभा सीट से भाजपा ने एक बार फिर से निरंजन ज्योति को टिकट दिया है। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा के प्रत्याशी के अफजाल सिद्दीकी को 1.87 लाख वोटों से हराया था। सपा-बसपा के गठबंधन ने इस सीट से सुखदेव प्रसाद को उतारा है। इससे पहले सपा ने राकेश सचान को यहां से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था। लेकिन गठबंधन के बाद ये सीट बसपा के हिस्से में आई। राकेश सचान अब कांग्रेस के टिकट पर यहां से उम्मीदवार हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा को कुल वोट 4.85 लाख वोट मिले थे। जो सपा-बसपा को मिले 4.78 लाख वोटों से कुछ ही ज्यादा रहे। प्रदेश की सीतापुर लोकसभा सीट की गिनती उन सीटों में होती है, जहां कुर्मी वोटर निर्णायक साबित होते हैं। इस सीट पर भाजपा के राजेश वर्मा, बसपा के नकुल दुबे और कांग्रेस की कैसर जहां के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। 2014 लोकसभा चुनाव में बसपा से भाजपा में आए राजेश वर्मा ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ी कैसर जहां को 51,027 वोटों से मात दी थी। सीतापुर लोकसभा सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा को 4.17 लाख वोट मिले थे। जबकि सपा-बसपा के खाते में कुल 5.22 लाख वोट गए थे। जो भाजपा को मिले वोट से ज्यादा थे। धौरहरा लोकसभा सीट पर भाजपा की रेखा वर्मा, कांग्रेस के जितिन प्रसाद और बसपा के अरशद सिद्दीकी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा की रेखा वर्मा ने बसपा के दाऊद अहमद को 1.25 लाख वोटों से पटखनी दी थी। इस सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा को भाजपा से ज्यादा वोट मिले थे। भाजपा को कुल 3,60,357 वोट मिले थे जबकि सपा-बसपा को 4,68,714 वोट मिले थे। चुनाव में बसपा-सपा के बीच वोटों का अंतर केवल 650 था।
मोहनलालगंज की लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने बसपा से कांग्रेस में आए आरके चैधरी को उतारा है। कांग्रेस के प्रत्याशी के खिलाफ बसपा ने सीएल वर्मा और भाजपा ने कौशल किशोर को उतारा है। जिससे यहां का मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कौशल किशोर ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े आरके चैधरी को 1,45,416 वोटों से हराया था। उस चुनाव में यहां सपा-बसपा के कुल 5,52,224 वोट भाजपा को मिले 4,55,274 वोटों से ज्यादा थे। कभी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का संसदीय क्षेत्र रहा लखनऊ पर 28 सालों से भाजपा का कब्जा हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह यहां से जीतकर संसद पहुंचे थे। भाजपा ने एक बार फिर से राजनाथ को यहां से उतारा है। जिनको चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने प्रमोद कृष्णम को उतारा है तो सपा से शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा लखनऊ से चुनावी मैदान में हैं।
2014 के लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी को 2.72 लाख वोटों से मात दी थी। जबकि बसपा तीसरे और सपा चैथे नंबर पर रही थी। सपा-बसपा वोटों को मिलाकर देखें तो कुल 1.21 लाख वोट उन्हें मिले, जबकि राजनाथ सिंह को 5.61 लाख वोट मिले थे। कांग्रेस का अभेद्य किला कही जाने वाली रायबरेली लोकसभा सीट से कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी एक बार फिर से चुनावी मैदान में हैं। भाजपा ने सोनिया के सामने कांग्रेस के पूर्व नेता दिनेश प्रताप सिंह को उतारा है। जबकि सपा-बसपा ने यहां से अपने प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है। इस सीट पर सपा-बसपा को अभी तक जीत नहीं मिली है। 2004 से रायबरेली से चुनाव लड़ रही सोनिया गांधी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के अजय अग्रवाल को 3,52,713 वोटों से हराया था। जबकि बसपा यहां तीसरे नंबर रही थी। वहीं हाई प्रोफाईल सीट अमेठी को कांग्रेस का गढ़ कहा जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर यहां से मैदान में हैं। उनके सामने भाजपा की केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी चुनाव लड़ रही हैं। इस सीट पर भी रायबरेली की तरह ही सपा-बसपा का गठबंधन चुनाव नहीं लड़ रहा है। 2014 के चुनाव में राहुल गांधी ने स्मृति ईरानी को 1,07,903 वोटों से हराया था। उस चुनाव में राहुल को 46.71 फीसदी, जबकि स्मृति को 34.38 फीसदी वोट मिले थे।
बांदा लोकसभा सीट पर भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा ने बसपा के पूर्व नेता आरके सिंह पटेल को उतारा है। वहीं सपा ने भाजपा के पूर्व नेता श्यामनाचरण गुप्ता को यहां से टिकट दिया है। कांग्रेस ने सपा के पूर्व नेेता बाल कुमार पटेल को उतार कर मुकाबले को त्रिकोणीय में बदल दिया है। दल बदलू तीनों ही प्रत्याशियों ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा के भैंरो प्रसाद मिश्रा ने बसपा के टिकट पर लड़े आरके सिंह पटेल को 1,15,788 वोटों से हराया था। उस चुनाव में भाजपा को कुल 3,42,066 वोट जबकी सपा-बसपा को कुल 4,16,008 वोट मिले थे, जो भाजपा को मिले वोटों से ज्यादा थे।
फैजाबाद लोकसभा सीट से भाजपा ने एक बार फिर से यहां के वर्तमान सासंद लल्लू सिंह को उतारा है। जिनके सामने कांग्रेस के निर्मल खत्री और सपा के आनंद सेन चुनावी मैदान में हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में लल्लू सिंह ने सपा के मित्र सेन यादव को 2,82,677 वोटों से हराया था। उस चुनाव में सपा-बसपा को भाजपा से कम वोट मिले थे। भाजपा को 4,91,663 वोट जबकि सपा-बसपा को 3,50,813 वोट मिले थे। फैजाबाद लोकसभा सीट राम मंदिर की वजह से चर्चा में रहती है। राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद के कारण ये सीट राजनीतिक रुप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। बहराइच लोकसभा सीट पर मुकाबला इस बार मजेदार है। क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर संसद पहुंची सावित्रीबाई फुले इस बार वहां से कांग्रेस की प्रत्याशी हैं। भाजपा ने अक्षयवर लाल और सपा ने शब्बीर अहमद को उतारकर यहां के चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।

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