अवध विवि के परीक्षा परिणामों में लापरवाही उजागर

    सैम्पलिंग मूल्यांकन के पश्चात् उत्तर पुस्तिकाओं के अंकों में परिवर्तित

    लखनऊ क्रिश्चियन कालेज के परीक्षक को पाया गया दोषी

    अब चार प्रश्नपत्रों में मिलेगी बैक पेपर की सुविधा

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    फैजाबाद। डाॅ0 राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने विगत पखवारे में विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2018 की मुख्य परीक्षा के घोषित किये गये स्नातक परीक्षा परिणामों के पश्चात् बी0एस0सी0 के छात्रों द्वारा अपने अंको को लेकर प्रत्यावेदन दिये गये थे, जिसके सापेक्ष परीक्षा समिति की बैठक में छात्रों द्वारा दिये गये प्रत्यावेदनों पर व्यापक विचार-विमर्श के उपरान्त विषयों की बाध्यता समाप्त करते हुये उन्हें 04 प्रश्नपत्रों में बैकपेपर की सुविधा प्रदान करने तथा प्राप्त प्रत्यावेदनों के सापेक्ष 100 उत्तर पुस्तिकाओं का सैम्पलिंग मूल्यांकन कराये जाने का निर्णय लिया गया था।
    उक्त प्रकरण के सन्दर्भ में सोमवार को कुलपति की अध्यक्षता में परीक्षा समिति की बैठक संयोजित की गई। बैठक में परीक्षा नियंत्रक प्रो0 एम0पी0 सिंह ने बताया कि परीक्षा परिणामों के घोषणा के पश्चात् कुलपति के निर्देश पर 23 जून 2018 तक छात्रों द्वारा उक्त सन्दर्भ में प्रत्यावेदन प्राप्त किये जाने थे, किन्तु छात्र हित में परीक्षा समिति की पूर्व बैठक 29 जून 2018 तक जितने भी छात्रों ने प्रश्नगत प्रकरण के सन्दर्भ में प्रत्यावेदन दिया था, उन सभी छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को सैम्पलिंग मूल्याकंन प्रक्रिया में सम्मिलित कर लिया गया था। ऐसी समस्त उत्तर पुस्तिकायें बी0एस0सी0 तृतीय वर्ष के भौतिक विज्ञान, गणित एवं रसायन विज्ञान के समस्त प्रश्न पत्रों तथा जीव विज्ञान के एक प्रश्न पत्र से सम्बन्धित थीं, जिनकी कुल संख्या 831 थी। छात्र हित में कुलपति से प्राप्त निर्देशों के क्रम में 100 उत्तर पुस्तिकाओं के स्थान पर समस्त 831 उत्तर पुस्तिकाओं को सैम्पलिंग मूल्यांकन की प्रक्रिया में सम्मिलित किया गया।
    परीक्षा नियत्रंक प्रो0 एम0पी0 सिंह ने सैम्पलिंग मूल्यांकन के परिणामों से समिति को अवगत कराते हुये बताया कि 831 उत्तर पुस्तिकाओं में से सैम्पलिंग मूल्यांकन के पश्चात्् 197 उत्तर पुस्तिकाओं के अंक अपरिवर्तित रहे 473 उत्तर पुस्तिकाओं में सैम्पलिंग मूल्यांकन के उपरान्त 1 से 6 प्रतिशत तक अंक घट गये, 131 उत्तर पुस्तिकाओं में 1 से 4 प्रतिशत तक अंको की वृद्वि हुई है, जबकि 09 उत्तर पुस्तिकाओं में 10 प्रतिशत तक अंकों में वृद्वि हुई तथा 21 उत्तर पुस्तिकाओं में 10 प्रतिशत से अधिक अंकों की वृद्वि हुई, जिसमें से 16 उत्तर पुस्तिकायें बी0एस0सी0 तृतीय वर्ष गणित तृतीय प्रश्न पत्र से सम्बन्धित और एक ही परीक्षक के द्वारा मूल्यांकित की गई पायी गयीं। सैम्पलिंग मूल्यांकन के इन परिणामों के आधार पर कुलपति द्वारा दिये गये निर्देशोें के अनुक्रम में जाॅच करने पर ज्ञात हुआ कि लखनऊ क्रिश्चियन कालेज के इस परीक्षक द्वारा उक्त विषय की कुल 300 उत्तर पुस्तिकायें ही मूल्यांकित की गयी हैं।
    सैम्पलिंग मूल्यांकन की उक्त सांख्यिकी से अवगत होने के पश्चात् व्यापक विचार-विमर्श के उपरान्त परीक्षा समिति ने सम्बन्धित शिक्षक को मूल्यांकन में लापरवाही का दोषी मानते हुये, इन्हें भविष्य में मूल्यांकन कार्यो से विरत किये जाने के साथ-साथ मूल्यांकन कार्य हेतु विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित पारिश्रमिक के भुगतान को रोके जाने का निर्णय लिया। साथ ही परीक्षा समिति ने कुलपति को अधिकृत किया कि उक्त परीक्षक द्वारा बरती गई लापरवाही, जिसके कारण विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हुई, से समस्त राज्य विश्वविद्यालयों को अवगत कराते हुये इन्हें भविष्य में मूल्यांकन कार्यो से वंचित किये जाने का अनुरोध पत्र प्रेषित किया जाये। तद््क्रम में परीक्षा समिति ने यह भी निर्णय लिया कि उक्त परीक्षक द्वारा बरती गयी घोर लापरवाही से छात्रों का अहित न हो इसलिये इनके द्वारा मूल्यांकित समस्त 300 उत्तर पुस्तिकाओं का पुर्नमूल्यांकन कराते हुये पुर्नमूल्यांकन में प्राप्त अंकों को ही अन्तिम रूप से छात्रों के अंक-पत्र पर अंकित किया जाये। परीक्षा समिति ने यह भी निर्णय लिया कि विभिन्न विषयों के अवशेष 14 छात्र जिनके अंकों में 10 प्रतिशत तक या उससे अधिक वृद्वि सम्भव है, उनके अनुक्रमांकों की सूची विश्वविद्यालय के सूचना पटल/वेबसाइट पर जारी करते हुये, उन्हें चैलेन्ज इवैल्यूवेशन (मूल्यांकन को चुनौती) की प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन करने की सलाह दी जाये।
    एक अन्य बिन्दु के सन्दर्भ में, जिसके सापेक्ष कृषि संकाय के अन्तर्गत स्नातक स्तर पाठ््यक्रमों में कृृपांक निर्धारित किये जाने सम्बन्धी प्रकरण पर विचार करते हुये परीक्षा समिति ने अध्ययन बोर्ड की आपात बैठक बुलाकर अध्ययन बोर्ड की संस्तुति के साथ प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाने का निर्णय लिया। एक अन्य बिन्दु के सन्दर्भ में, जिसके सापेक्ष लगभग 200 महाविद्यालयों द्वारा परीक्षा सम्बन्धी बकाया शुल्क सम्बन्धित प्रकरण पर विचार करते हुये परीक्षा समिति ने निर्णय लिया कि ऐसे समस्त महाविद्यालयों को बकाया शुल्क जमा करने का अवसर देते हुये आगामी 16, 17 एवं 18 जुलाई, 2018 को परिसर के सन्त कबीर सभागार में इन महाविद्यालयों के प्राचार्यो की बैठक आहूत कर इन्हें परीक्षा शुल्क सम्बन्धी एकाउन्ट को सैटेल करने का अन्तिम अवसर प्रदान किया जाय और तब तक के लिये सम्बन्धित महाविद्यालयों के अंकपत्रों को रोक लिया जाय। इस अन्तिम अवसर के बाद भी यदि महाविद्यालय परीक्षा शुल्क सम्बन्धी एकाउन्ट को सैटेल करने में असफल रहते है, तो ऐसे महाविद्यालयों की सूचीं को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रदर्शित करते हुये छात्रों को इन महाविद्यालयों में प्रवेश न लेने की सलाह दी जाय। बैठक में प्रमुख रूप से शिक्षक संघ के अध्यक्ष डाॅ0 विजय प्रताप सिंह, महामन्त्री डाॅ0 हेमन्त सिंह, संकायाध्यक्ष विज्ञान संकाय, प्रो0 आर0के0 तिवारी, संकायाध्यक्ष विधि, डाॅ0 त्रिभुवन शुक्ला उपस्थित रहे।