-कुम्हारन का पुरवा के एक घर में ढाई लाख मिट्टी का दीपक है डंप, बिक्री ठप होने से दो दर्जन से अधिक परिवारों पर आर्थिक संकट

सोहावल।अयोध्या के दीपोत्सव से संकट के बादल छा गए हैं। विकास खंड सोहावल की ग्राम पंचायत देवई के मजरे कुम्हारन का पुरवा में करीब दो दर्जन से अधिक परिवारों ने 10 से 12 लाख मिट्टी के दीपक तैयार किए हैं, लेकिन खरीदार नदारद हैं। दीपकों की बिक्री नहीं होने से इन परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हालात यह हैं कि बिचौलिए 80 से 90 पैसे प्रति दीपक की दर से खरीदने की बात कर रहे हैं। जबकि पहले एक दीपक सवा रुपये तक में बिकता था।
ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष 2017 में अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत के बाद इस गांव के कुम्हार परिवारों को मिट्टी के दीपक की मांग बढ़ने से रोजगार की नई उम्मीद मिली थी। प्रशासन की पहल और प्रोत्साहन से कुम्हारी कला छोड़ चुके परिवार भी दोबारा दीपक बनाने के काम में जुट गये । पूर्व प्रधान के भाई राघवेंद्र तिवारी का कहना है कि शुरुआत में यहां से करीब सात लाख दीपक तैयार कर अयोध्या भेजे गए थे। धीरे-धीरे उत्पादन बढ़कर 10 से 12 लाख दीपक तक पहुंच गया। इसके लिए कुछ परिवारों को मिट्टी निकालने के लिए जमीन का पट्टा भी दिया गया था।एक परिवार के पास ढाई लाख दीपक तैयार है।
गांव की किरन ने बताया कि उन्होंने करीब ढाई लाख दीपक बनाकर रखे हैं। लेकिन अब तक कोई खरीदार नहीं पहुंचा। बिचौलिए 80 से 90 पैसे प्रति दीपक देने की बात कह रहे हैं। जबकि पहले सवा रुपए में बिक्री हुई थी। अब एक रुपए भी कोई दाम नहीं दे रहा है। इसी तरह जुगरा और रागिनी ने 70-70 हजार, गुड्डन ने डेढ़ लाख, जबकि भदई और धर्मेंद्र ने लगभग एक-एक लाख दीपक तैयार किए हैं। इन परिवारों का कहना है कि पहले अधिकारी और ठेकेदार गांव पहुंचकर दीपक खरीदकर ले जाते थे।लेकिन इस बार बिक्री को लेकर कोई खास पहल दिखाई नहीं दे रही है।
कर्ज लेकर दीपक तैयार किया। लेकिन अब लागत निकालना मुश्किल हो गया है।ग्रामीणों का कहना है कि दीपक बनाने में मिट्टी के साथ गोबर के उपले और अन्य सामग्री का इस्तेमाल होता है। उत्पादन के लिए काफी मेहनत और पूंजी लगती है। कई परिवारों ने कर्ज लेकर दीपक तैयार किए हैं। बिक्री नहीं होने से उनकी पूंजी फंस गई है।इसके साथ ही कर्ज चुकाने की चिंता सताने लगी है। वर्षों पुराने महिला स्वयं सहायता समूह से भी दीपक निर्माण में अपेक्षित सहायता नहीं मिल रही है।
ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते दीपकों की खरीद नहीं हुई तो उनकी मेहनत बेकार हो जायेगी। जिससे परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा सकता है। कुम्हार परिवारों ने दीपकों की खरीद सुनिश्चित कराने और उचित मूल्य दिलाने के लिए संबंधित अधिकारियों से पहल करने की उम्मीद जताई है।