सोहावल। क्षेत्र में अब अवैध कटान करने वाले ठेकेदारों से सरकारी संपत्ति भी सुरक्षित नहीं है। यहां धड़ल्ले से अवैध कटान पर अंकुश लगाने में वन विभाग भी नाकाम साबित हो रहा है। अभी दो दिनों से प्रतिबंधित पेड़ों की अवैध कटान का मामला सामने आया ही है। अब रौनाही पम्प कैनाल के डाक बंगला परिसर में भी खड़े पेड़ सुरक्षित नहीं है।
डाक बंगला परिसर में बिना नीलामी के चोरी छिपे कई आम के सूखे पेड़ काटकर बेच लिए गए है। विभाग को कट चुके पेड़ों की खबर तक नहीं है। सरयू नदी तट के किनारे साल 1937 में अंग्रेजों के जमाने में क्षेत्र के हजारों किसानों के खेतों की सिंचाई व विद्युत पावर हाउस सोहावल में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रौनाही पंप कैनाल का निर्माण कराया गया था।
कई दशक बाद पंप कैनाल और डाक बंगला के स्थित जर्जर हुई। तो पूर्व सिंचाई मंत्री स्वर्गीय मुन्ना सिंह चौहान की नजरे पंप कैनाल पर इनायत हुई और लाखों रुपए की लागत से इसका सौंदर्यकरण कराया गया। डाक बंगला परिसर में आम,सागौन,शीशम,कटहल आदि के वृक्ष भी स्थापित किए गए है। रामजन्म भूमि मंदिर निर्माण के बाद वर्तमान अधिशासी अधिकारी रजनीश गौतम ने जर्जर हो चुके पम्प कैनाल स्थल व डाक बंगाल के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया और डाक बंगला और चौधरी चरण सिंह पम्प कैनाल का सौंदर्यकरण कराया गया। अब यहां प्रतिदिन पंप कैनाल की सुंदरता स्थानीय लोगों और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
लेकिन इसी बीच डाक बंगला परिसर में करीब कई वर्ष पुराने आम के पेड़ सूख गए। इस पर ठेकेदारों की नजर पड़ गई। चारों तरफ से बाउंड्री वॉल से सुरक्षित और गेट पर सुरक्षा की दृष्टि से ताला लटका देख स्थानीय ठेकदार सरकारी पेड़ों की कटान के लिए छपान और नीलामी का इंतजार करने लगे। इसी बीच डाक बंगला परिसर में सुख चुके आम के पेड़ों को काटकर बेंच दिया जा रहा है। जबकि पंप कैनाल से जुड़ी नहर की सफाई हो रही है और डाक बंगला परिसर की देखरेख में कर्मचारी भी नियुक्त है। नहर सिंचाई विभाग के अधिशासी अधिकारी रजनीश गौतम ने बताया कि अभी सूखे पेड़ों की नीलामी नहीं हुई है। प्रक्रिया में शामिल है। अगर डाक बंगला परिसर से पेड़ काटकर बेचें गए हैं तो जांच के बाद दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी।