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वायरल डिजीज का अंत नहीं : डॉ. हर्षवर्धन

-डॉक्टरों से परिचर्चा को अयोध्या पहुंचे मेदांता के डॉक्टर

अयोध्या। कोविड-19 के प्रकोप से जहां पूरा विश्व भयभीत हो चुका है। लाखों को असमय मौत की नींद सुलाने वाले इस वायरस के बारे में डॉक्टर भी चिंतित है। प्रेस से बातचीत में मेदांता गुरुग्राम के डॉक्टरों ने बताया कि फेफड़े को संक्रमित करने वाले इस डिजीज से कभी भी पूर्णरूप से मुक्ति नहीं मिलेगी। दिनचर्या में बदलाव ही बचाव है।

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शनिवार को अयोध्या पहुंचे मेदांता गुरुग्राम के डॉक्टर हर्षवर्धन पुरी व डॉक्टर श्याम विष्ट ने कृष्णा पैलेस सभागार में पत्रकारों के साथ अपनी बात साझा की। डॉ हर्ष ने कहा कि कोविड जैसे डिजीज की भयंकरता को सारी दुनिया देख चुकी है। बहुत हद तक इसकी भयंकरता पर काबू पा लिया गया लेकिन सूक्ष्म रूप से मौजूद इसके वायरस अब आजीवन चलते रहेंगे। क्योकि हमारी दिनचर्या बहुत बदल गई है। शुद्ध आहार, व्यायाम, प्राणायाम से लोग दूर हो रहे हैं। फास्टफूड कल्चर बढ़ रहा है। ऐसे में बचने के लिए 30-40 वर्ष पूर्व की दिनचर्या अपनानी होगी।

शुद्ध आहार, व्यायाम, प्राणायाम पर बल देते हुए डॉक्टर हर्ष ने कहा कि सूक्ष्म वायरस का प्रभाव ऐसा नहीं होगा जिससे ऑक्सीजन की जरूरत पड़े। हम दवाओं से ठीक हो सकते हैं। बताया की महज कुछ प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। बताया कि गले मे भारीपन, सर्दी, जुकाम आदि नॉर्मल तरह से होते रहेंगे। इनके बीच ही हमें जीवन ढालना होगा। डॉ हर्ष का कहना है कि प्रदूषण, धूम्रपान आदि से फेफड़े संक्रमित होते हैं। ईश्वर या प्रकृति की कृपा थी कि कोविड के इस जानलेवा हमले के बाद हमारे फेफड़े 90 प्रतिशत प्रारंभिक अवस्था में आ चुके हैं।

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ऐसे में हमें 30-40 साल पुरानी लाइफ स्टाइल को अपनाना ही होगा। डॉक्टरों ने अयोध्या आने का उद्देश्य बताया कि अभी सभी जगह आधुनिक तकनीकी उस स्तर की नहीं है जैसा की मेदांता हॉस्पिटल गुरुग्राम में है। मेदांता में बैठकर देश, विदेश के विशेषज्ञ डॉक्टरों से चर्चा हो जाती है लेकिन हर जगह वह तकनीक नहीं है। ऐसे में स्थानीय अस्पतालों के डॉक्टरों से इस मुद्दे पर स्वस्थ परिचर्चा करने आए हैं।

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