-तीन स्टेज़ से गुजरती है लव ट्रेन
अयोध्या। वैलेंटाइन्स-डे प्रेरित किशोर व युवा रोमांटिक लव पार्टनर की खोज से इस तरह चलायमान हो सकते है जो वर्ष भर छद्म प्रेमी युगल बनने और बनाने की मनचली मनोदशा के रूप में दिखाई पड़ सकता है जिसके मनोदुष्परिणाम ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम या रिएक्टिव डिप्रेशन के रूप मे दिखाई पड़ते है तथा अकादमिक व कैरियर फोकस को दुष्प्रभावित कर सकते है । यौनाकर्षण से शुरु होकर स्थायी प्यार की यात्रा के तीन चरण होते हैं
पहली स्टेज में पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन व महिलाओं में एस्ट्रोजन यौनाकर्षण हार्मोन मे वृद्धि होती है।
दूसरी स्टेज में हैप्पी हार्मोन इन्डॉर्फिन तथा तीसरी स्टेज में बॉन्डिंग व इमोशनल कनेक्टिविटी हार्मोन ऑक्सीटोसिन मे वृद्धि होती है। यह तीनो स्टेज क्रमशः लस्ट,अट्रैक्शन व अटैचमेंट की स्टेज कहलाती है। यौनाकर्षण व प्यार के लिये हैप्पी हार्मोन्स जिम्मेदार होते हैं।
डोपामाइन मनोरसायन स्नेह, उल्लास, चाहत, अट्रैक्शन बढ़ाता है वहीं इंडोर्फिन रसायन
अट्रैक्शन, खुशी, पॉजिटिव फीलिंग्स व मोटिवेशन बढ़ाता है तथा ऑक्सीटोसिन हार्मोन बॉन्डिंग व कमिटमेंट बढ़ाता है।
यौनाकर्षण के स्थायी प्यार मे कन्वर्ट करने वाला हार्मोन सेरोटोनिन लव स्टेबलाइज़र का कार्य करता है जो उम्र बढ़ने के साथ संवर्धित होता है। इस मनोजागरूकता से युवा व किशोर अपने लस्ट को लव समझने की भूल से बच सकते हैं। जिला पुस्तकालय मे आयोजित वैलेंटाइन्स-वीक संदर्भित यौनाकर्षण व प्यार मनोविभेद विषयक व्याख्यान में जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन ने यह बातें कही। जिला विद्यालय निरीक्षक के अनुमोदन तथा प्रभारी पुस्तकालयाध्यक्ष राजेश तिवारी के संयोजन में आयोजित सत्र में प्रतियोगी परीक्षार्थियों के संशयों का समाधान भी किया गया।