अयोध्या। संयुक्त किसान मोर्चा ने सोमवार को बीज विधेयक 2025 और बिजली विधेयक 2025 को वापस लेने की मांग को लेकर तहसील सदर पर दोनों विधेयकों की प्रतियां जलाकर जमकर विरोध किया। किसान नेताओं ने कहा कि यह बीज विधेयक छोटे किसानों को बेदखल करने और भारत की बीज संप्रभुता को मुट्ठी भर बहुराष्ट्रीय और घरेलू बड़ी कम्पनियों को सौंपने के लिए आरएसएस – भाजपा की बड़ी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।
नेताओं ने कहा कि विधेयक में किसानों के अधिकारों और राज्य सरकारों के अधिकारों को नष्ट करके कम्पनियों द्वारा बीजों के मूल्य निर्धारण की सुविधा प्रदान करके किसानों को कुचलने और लूटने में तेजी लाने के लिए आवश्यक तत्व है एवं सक्रिय रूप से बीज क्षेत्र में संतुलन को बड़े कारपोरेट खिलाड़ियों के पक्ष में स्थानांतरित करने का काम करेगा।
नेताओं ने आरोप लगाया कि बिजली विधेयक 2025 का मसौदा बड़े पैमाने पर निजीकरण, व्यवसायीकरण और भारतीय बिजली प्रणाली के केंद्रीयकरण के लिए तैयार किया गया है। यदि इसे लागू किया जाता है तो यह दशकों से निर्मित एकीकरण और सामाजिक रूप से संचालित बिजली ढांचे को ध्वस्त कर देगा तथा बिजली वितरण और उत्पादन के क्षेत्रों को निजी निगमों को सौंप देगा।
किसान नेताओं ने कहा कि आरएसएस भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार कारपोरेट समर्थक विधेयकों को ऐसे समय में आगे बढ़ा रही है जब भारत में कृषि संकट गहरा रहा है और किसान आत्महत्याएं बढ़ती जा रही हैं। संयुक्त किसान मोर्चा इन विधेयकों का कड़ा विरोध करती है और इसे किसी भी कीमत पर वापस लेने के सरकार को मजबूर करेगी।
विरोध कार्यक्रम में संयुक्त किसान मोर्चा संयोजक मया राम वर्मा, उत्तर प्रदेश किसान सभा के प्रदेश सचिव अशोक कुमार तिवारी, भाकपा (माले) जिला प्रभारी अतीक अहमद, भाकियू नेता कमला प्रसाद बागी, राजेश वर्मा, ओमप्रकाश यादव, उत्तम कुमार, भोजराज वर्मा, भीम पटेल, सुभाष वर्मा सहित दर्जनों लोग शामिल रहे।