-आंदोलनकारियों की प्रशासन के बीच दूसरी बैठक होने की नौबत ही नहीं आ सकी
अयोध्या। जनपद के तीनों टोल प्लाजा को लेकर चलाया गया टोल मुक्त आंदोलन सियासत की भेंट चढ़। होली बाद होने वाले आंदोलनकारियों की प्रशासन के बीच दूसरी बैठक होने की नौबत ही नहीं आ सकी। हुंकार भर रहे आंदोलन कारियों के नेताओं ने पैर पीछे खींच कर हाथ खड़ा कर लिया है। क्षेत्रीय लोगों की टोल समस्या जस की तस बनी हुई है। निकट भविष्य में इसके परवान चढ़ने की अब उम्मीद भी नहीं दिखाई पड़ रही है।
एनएच 27 पर टोल प्लाजा रौनाही, अयोध्या -प्रयागराज हाइवे का पिपरी, अयोध्या रायबरेली रोड का कुचेरा सहित तीनों टोल प्लाजा एक दूसरे से बीस किलोमीटर की परिधि में ही स्थित है। जहां यूपी 42 से जुड़े क्षेत्र के वाहन चालकों को टोल टैक्स देना पड़ता है। लोकल होने के बावजूद इन्हें छूट नहीं है। शासनादेश के मुताबिक 56 किलोमीटर की परिधि में एक टोल का ही नियम है। इसी बात को लेकर फरवरी में कुछ लोगों ने टोल मुक्त आंदोलन की मुहिम चलाई। राजनीति में अपना चेहरा सामने लाकर लोकप्रियता हासिल की और लगा कि आम आदमी को इन टोल बूथों से बस्ती टोल प्लाजा की तर्ज पर टोल मुक्त होने का लाभ मिल जाएगा।
लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। टोल प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच युगलबंदी आंदोलन के विपरीत गई। टोल मुक्त संघर्ष समिति के कर्ता धरता अधिवक्ता दीपक सिंह,शिक्षक नेता राजेश प्रताप सिंह, शरद पाठक बाबा, लखौरी गाँव निवासी व्यवसाई अभिषेक सिंह टिंकू आदि सहित दर्जनों लोगों को प्रशासनिक अधिकारियों ने टोल प्रबंधकों के साथ निर्णय के लिए बैठक कराने का आश्वासन दिया था। जिसकी नौबत अभी तक नहीं आई। टोल मुक्त आंदोलन पूरी तरह गर्त में चला गया। मंगलवार को पूछे जाने पर आंदोलन के अगुआ रहे अधिवक्ता दीपक सिंह ने कहा कि क्षेत्रीय जनप्रतिधियों ने सहयोग नहीं किया।मंत्रियों से बात करने की बात कहकर टाल दी। जिनके वाहनों के काफिले रोज टोल मुक्त होकर फर्राटा भर रहे है।
शिक्षक नेता राजेश प्रताप सिंह ने कहा कि आंदोलन की मुहिम में कुछ बदलाव आया है। जिसके चलते मुहिम धीमी पड़ गई। अब नए सिरे से आंदोलन चलाने की आवश्यकता है। पूंछे जाने पर एसडीएम सोहावल सुश्री सविता ने बताया कि टोल मुक्त आंदोलन समिति के द्वारा दिए गए ज्ञापन पर शासन की ओर से कोई निर्देश नहीं मिला है। जिसका अनुपाल कराया जा सके।