-सपा नेता व पूर्व मंत्री तेजनारायण पाण्डेय पवन ने लगाए गड़बड़ी के आरोप
अयोध्या। एसआईआर को लेकर एक बार फिर से सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सरकार और चुनावी तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं। बुधवार को शाने अवध सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्य मंत्री तेज नारायण पांडेय पवन ने कहा कि जिन मतदाताओं ने एसआईआर फॉर्म भरकर समय से जमा किया था, उनके नाम भी मतदाता सूची से काट दिए गए हैं, जो बेहद गंभीर मामला है।
पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि बीएलओ मतदाताओं को समय पर नोटिस नहीं दे रहे हैं। नोटिस देने में जानबूझकर देरी की जा रही है, जिससे मतदाताओं के जवाब देने की समय-सीमा समाप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि कई जगह बीएलओ नोटिस दबाकर रखे हुए हैं, जिससे आम मतदाता अपने अधिकार से अनजान रह जाता है। उन्होंने मांग की कि सभी बीएलओ मतदाताओं के घर तक नोटिस पहुंचाएं, ताकि कोई भी व्यक्ति लोकतंत्र के इस महापर्व में अपने मतदान अधिकार से वंचित न हो।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीएलओ भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में था और जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में भी मतदान किया, आज उन्हीं मतदाताओं के नाम एसआईआर फॉर्म भरने के बावजूद काटे जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने मामले में निष्पक्ष जांच और तत्काल सुधार की मांग की है। इस मौके पर सपा के नि. महानगर अध्यक्ष श्याम कृष्ण श्रीवास्तव नि. महासचिव हामीद जाफर मीसम, मुकेश यादव व प्रवक्ता राकेश यादव भी मौजूद थे।
सपा नेता आनंद मिंटू को नोटिस, मतदाता सूची से नाम कटने पर चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

मिल्कीपुर। समाजवादी पार्टी के युवजन सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद सिंह “मिंटू” ने निर्वाचन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग निष्पक्षता से काम नहीं कर रहा। उन्होंने दावा किया कि उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है और इस संबंध में उन्हें एक नोटिस भी प्राप्त हुआ है। मिंटू ने बताया कि वे स्वयं विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान कैंप लगाकर लोगों के फॉर्म भरवाने में मदद कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उनका ही नाम सूची से काट दिया गया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चौंकाने वाली है, खासकर तब जब उनका परिवार दशकों से क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके पिता लगभग 40 वर्षों तक ग्राम पंचायत का प्रतिनिधित्व करते रहे और प्रधान पद पर रहे।
सपा नेता ने आशंका जताई कि उन्हें राजनीतिक रूप से सक्रिय होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, जब एक सक्रिय जनप्रतिनिधि का नाम इस तरह हटाया जा सकता है, तो आम लोगों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है, जिनके पास जरूरी दस्तावेज जुटाने में दिक्कत होती है। मिंटू ने बताया कि उन्हें एसआईआर मिलान के लिए पासपोर्ट, हाई स्कूल की मार्कशीट और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि वे तो ये दस्तावेज उपलब्ध करा देंगे, लेकिन कई गरीब और ग्रामीण लोगों के लिए यह आसान नहीं होगा। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को आम मतदाताओं के लिए परेशान करने वाला बताया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका नाम केवल सरूरपुर ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज रहा है और कहीं अन्यत्र पंजीकरण नहीं है। मिंटू ने इस घटनाक्रम को “सोची-समझी साजिश” करार देते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक विचारधारा के आधार पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। आनंद सिंह मिंटू ने बताया कि उन्हें 29 तारीख को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के लिए बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले की शिकायत उच्च स्तर पर भी करेंगे।