प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा आज के विज्ञान से कहीं ज्यादा समृद्ध व उन्नत रही : डॉ. बिजेंद्र सिंह

by Next Khabar Team
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-अवध विवि में भारतीय ज्ञान परंपरा पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन देश-विदेश के जुटे शिक्षाविद

अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में में भारतीय ज्ञान परंपरा पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस (8, 9 दिसंबर) 13 इंटरनेशनल साइंस कांग्रेस 2025 का आयोजन इंटरनेशनल साइंस कम्युनिटी एसोसिएशन एवं विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह रहे। अन्य विशिष्ट शिक्षाविदों में त्रिभुवन विश्वविद्यालय काठमांडू नेपाल की प्रो. सुशीला देवी श्रेष्ठ, बोत्सवाना विश्वविद्यालय रसायन विज्ञान के प्रो. गिरजा शंकर सिंह रहे।

कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा एक समृद्ध और विविध विरासत है जो हजारों वर्षों से चली आ रही है। यह केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि विज्ञान, कला, सामाजिक व्यवस्था और जीवन-दर्शन के सभी पहलुओं को समाहित करती है। कुलपति ने आगे बताया कि यह परंपरा केवल बौद्धिक ज्ञान नहीं देती, बल्कि छात्रों में नैतिकता, आत्मविश्वास, अनुशासन और चरित्र निर्माण पर विशेष बल देती है। भारतीय ज्ञान परंपरा का लक्ष्य केवल व्यक्तिगत विकास नहीं, बल्कि समस्त मानवता का कल्याण है। यह सह-अस्तित्व सबके साथ रहने और सर्वे भवन्तु सुखिनः के भाव पर आधारित है। कुलपति ने कहा कि शिक्षा तो सीखने और सीखने की कला है।

बिना अच्छी शिक्षा के आप कुछ नहीं बदल सकते। प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा आज के विज्ञान से कहीं ज्यादा समृद्ध और उन्नत रही थी। पूरे ब्रह्मांड का गूढ़ ज्ञान हमारे धर्म ग्रंथो में छुपा है। कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि विकास के नाम पर जल, भूमि और पर्यावरण को प्रदूषित किया गया है। आधुनिक विकास प्राकृतिक संसाधनों को खो कर किया गया है। भारत की कृषि परंपरा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में फसलों की बुवाई व कटाई के लिए भी नक्षत्रों का ज्ञान भारतीयों को था। कृषि के लिए मुहूर्त तक देखा जाता था। उससे उन्हें अच्छी फसल मिलती थी। अब इसे विज्ञान कॉस्मिक एनर्जी के रूप में देख रहा है।

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प्रो. गिरजाशंकर सिंह ने बताया कि विज्ञान, तकनीक, कृषि भारतीय ज्ञान परंपरा का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। महान शिक्षाविद पं. महामना मदन मोहन मालवीय ने बीएचयू की स्थापना इसी उद्देश्य को लेकर की थी जो आज वैश्विक पटल पर स्वयं को सिद्ध कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पर्चन से किया गया।

इसी सत्र में इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड पर रिसर्चर 2025 प्रो. दयानंद मिजोरम एवं गुजरात विश्वविद्यालय की प्रो. संगीता शर्मा, नागपुर महाराष्ट्र की डॉ. कविता गौर, आरा विश्वविद्यालय बिहार के प्रो. विनय कुमार मिश्र एवं देहरादून उत्तराखंड की डॉ. स्तुति गुप्ता को विशिष्ट शैक्षिक उपलब्धि के लिए अवॉर्ड प्रदान किया गया। इस अवसर पर कॉन्फ्रेंस की सोविनियर एवं एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन 20 तकनीकी सत्रों में किया जाएगा। इस कांफ्रेंस में 230 शोध पत्र प्राप्त हुए हैं और बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है।

स्वागत उद्बोधन कॉन्फ्रेंस के संयोजक प्रो. एस एस मिश्र ने किया। कार्यक्रम का संचालन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. फर्रुख जमाल ने किया। इस अवसर पर प्रो. आशुतोष सिन्हा प्रो. सी के मिश्र, प्रो. अनूप कुमार, प्रो. फर्रुख जमाल, प्रो. शैलेंद्र कुमार, प्रो के के वर्मा, प्रो गंगाराम मिश्र, डॉ. अनिल यादव, डॉ. नीलम यादव डॉ. मनीष सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

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