-चिंता व तनाव का नींद पर होता है दुष्प्रभाव, नीद है ब्रेन बैटरी चार्जर
अयोध्या। स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल में वृद्धि निद्राचक्र दुष्प्रभावित करती है। चिंता या तन्नाव के लगातार बने रहने पर मूड स्टेबलाइज़र हार्मोन सेरोटोनिन व नींद के जिम्मेदार हार्मोन मिलेटॉनिन में कमी आने से नींद की लयबद्धता बिगड़ कर स्लीप डिसऑर्डर का रूप ले लेती है। नींद लयबद्ध तरीके से पांच चरणों से होकर एक निद्राचक्र पूरा करती है । बच्चों में यह चक्र लगभग एक घण्टे का तथा बड़ों में डेढ़ घण्टे का होता है तथा एक सामान्य वयस्क निद्रा का औसत समय साढ़े सात घण्टे का होता है।
सोने के एक घण्टे के बाद नींद टूटने से स्लीप वॉकिंग का अटैक होने की संभावना होती है। इस स्थिति में भ्रम या मूर्छा जैसी स्थिति में आकर दिशाहीन चलने लग सकने की स्थिति बन सकती है जिसे सोमनाएम्बुलिज़्म कहा जाता है। सोने से ढाई से तीन घण्टे के बीच नींद टूटने से चौंक कर उठ जाने तथा धड़कन व सांस की गति बढ़ी हुई तथा चीखने या रोने की दशा को नाईट-मेयर नाम से जाना जाता है ।
इसी तरह गहरे स्वप्न की स्थिति में नींद टूटने से व्यक्ति एक सम्मोहन की स्थिति में उठकर सक्रिय हो सकता है तथा मांश पेशियों में टपकन, झनझनाहट, खिंचाव व दर्द, पैर का पटकना, नींद में बड़बड़ाना तथा शरीर का सुन्न हो जाना भी पैरासोमनिया का उदाहरण है जिसे स्लीप ट्रेमर कहा जाता है। बच्चो द्वारा नींद में बिस्तर पर पेशाब कर देना भी इसी के अंतर्गत आता है जिसे बेड-वेटिंग या नाक्टर्नल- एन्यूरेसिस कहा जाता है।
इतना ही नहीं, स्लीप पैरालिसिस के दौरान शरीर के सुन्न होने व बोल व आँख तक न खोल पाने तथा किसी के सीने पर बैठे होने तक का भ्रम भी कुछ सेकंड्स तक हो सकता है जिसे लोग भूत प्रेत से भी जोड़ कर देखते हैं। कुछ लोगों में नींद न आने या सोते समय ही मौत हो जाने जैसे भय भी दिखायी पड़ते हैं। निद्रा विकार दो हफ्ते से ज़्यादा बने रहने पर मनोपरामर्श अवश्य लें क्योंकि नींद से ब्रेन बैटरी चार्ज हो कर मनोशारीरिक स्वास्थ्य का संवर्धन करती है। मार्च के प्रथम सप्ताह के निद्रा जागरूकता सप्ताह संदर्भित वार्ता में यह जानकारी जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन ने दी।