-चितवन, हस्त मुद्रा व पद विन्यास का अद्भुत समन्वय, सधी भावभंगिमाओं ने कथक को जीवंत किया

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा आयोजित द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह के चौथे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम में फिरोजाबाद के मयूरी शर्मा एवं समूह ने नृत्यांजलि प्रस्तुति में “श्रीराम चरित्रम“, “दशावतार“ कथक नृत्य नटिकाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम के प्रारम्भ में ’जन्मे अवध में राम मंगल गाओ री…..’ गीत से शुरू हुए कथक नृत्य ने पालक झपकते ही सम्मोहन में बांध लिया, पंडाल में चलायमान लोग स्थिर होकर एक स्थान पर बैठ गए। नाटिका में नैनों की भाव भंगिमा, हस्त मुद्राएं, व पैरों का सुंदर संचालन मुग्ध कर रहा था।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन की संक्षिप्त झांकी प्रस्तुत करते हुए अयोध्या में श्रीराम का जन्म, ताड़का वध, सीता स्वयंवर की प्रस्तुति “राम को देख कर श्री जनक नंदिनी…“ मोहक गीत के साथ कियाद्य इसके बाद राम विवाह का वर्णन “तुम उठो सिया श्रृंगार करो..“गीत के साथ हुआ इसके बाद वनवास की प्रस्तुति “राम बिना मोरी सूनी अयोध्या“ गीत से किया गया फिर क्रमशः सीता हरण, शबरी और हनुमान जी से मिलन, रावण वध और अंत में अयोध्या वापसी का जीवंत मंचन किया गया। नाटिका में सत्य, धर्म और धैर्य की सदैव विजय होने का संदेश दिया गया।
तीन ताल में प्रस्तुत “दशावतार“ में भगवान विष्णु के प्रथम मत्स्यवतार, दूसरा कूर्मा वतार, तीसरे वराह अवतार, चौथा नरसिंह, पांचवा वामन, छठा परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्किवतार का मंचन किया। समूह ने अर्धनारीश्वर की जीवंत प्रस्तुति देते हुए शिव और शक्ति का अद्भुत संगम, जहाँ सृजन और संहार एक ही स्वरूप में समाहित हैं। प्रस्तुति दे समरसता, संतुलन और पूर्णता का संदेश दिया। नृत्य नाटिका की परिकल्पना और संयोजन मयूरी शर्मा ने किया मुख्य रूप से सलोनी, पूजा दिवाकर, शालू दिवाकर, आशिका गुप्ता, पावनी गुप्ता, वंशिका, इशिका गुप्ता, रिद्धिमा चौसैया, मैत्री जैन, तमन्ना कुमारी व साक्षी दिवाकर ने हिस्सा लिया। मंच संचालन देश दीपक मिश्र ने किया। कार्यक्रम मंच पर ट्रस्ट महासचिव चम्पतराय, राजेंद्र सिंह पंकज, धनंजय पाठक, डॉ चंद्र गोपाल पाण्डेय, विनोद श्रीवास्तव, कप्तान केके तिवारी उपस्थित रहे।