-अब सिर्फ नगर कोतवाली, थाना कैंट और जीआरपी थाने से लाए गए मामलों में ही मेडिकोलीगल
अयोध्या। जिला अस्पताल में लगातार बढ़ती लापरवाही और अनियमितताओं को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ राजेश सिंह के निर्देश पर प्राइवेट मेडिकोलीगल परीक्षण को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अब केवल पुलिस थानों से आए मामलों में ही मेडिकोलीगल रिपोर्ट बनाई जाएगी। इस फैसले से अस्पताल परिसर में मौजूद कई फार्मासिस्ट और मेडिकल प्रतिनिधि बेहद चिंतित नजर आए।
अब सिर्फ नगर कोतवाली, थाना कैंट और जीआरपी थाने से लाए गए मामलों में ही मेडिकोलीगल परीक्षण किया जाएगा। इसके अलावा जिन मामलों में पुलिसकर्मी या होमगार्ड के जवान साथ मौजूद होंगे, केवल उन्हीं का मेडिकोलीगल होगा। बिना पुलिस के आए सामान्य नागरिकों का प्राइवेट मेडिकोलीगल पूरी तरह बंद रहेगा।पिछले कुछ महीनों से प्राइवेट मेडिकोलीगल में कई तरह की अनियमितताएं सामने आ रही थीं। कई बार फर्जी दस्तावेजों के साथ लोग आते थे, गलत रिपोर्ट बनवाने की कोशिश की जाती थी और कुछ मामलों में तो चिकित्सकों पर दबाव भी डाला जाता था।
इन सबको देखते हुए प्रभारी सीएमएस डॉ राजेश सिंह ने सख्ती दिखाते हुए प्राइवेट मेडिकोलीगल को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया।
पहले लोग चोटिल व्यक्ति या उनके परिजन सीधे अस्पताल आकर मेडिकोलीगल करवाते थे। अब पुलिस के बिना मेडिकोलीगल नहीं होगा तो मरीजों की संख्या में भारी कमी आएगी। एक फार्मासिस्ट ने नाम न छापने की शर्त पर बताया पहले दिन में आठ से दस प्राइवेट मेडिकोलीगल के मरीज आते थे, अब ये पूरी तरह बंद हो गए।
अस्पताल परिसर में मौजूद कई लोग इस फैसले से निराश दिखे। कुछ का कहना था कि छोटी-मोटी चोटों के लिए पुलिस थाने के चक्कर काटना और फिर अस्पताल आना बहुत परेशानी वाला होगा। वहीं कुछ लोगों ने प्रशासन के फैसले का स्वागत भी किया। उनका कहना था कि प्राइवेट मेडिकोलीगल में बहुत धांधली होती थी, कई लोग बीमा क्लेम के लिए फर्जी रिपोर्ट बनवाते थे। इस बंदी से कम से कम गलत काम पर रोक लगेगी। फिलहाल जिला अस्पताल में सिर्फ सरकारी और पुलिस केस में ही मेडिकोलीगल की सुविधा उपलब्ध रहेगी। प्रशासन का कहना है कि मरीजों के हित और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।