-नायब तहसीलदार को सौंपा राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन

अयोध्या। एमएसपी पर फसल खरीद की गारंटी, सम्पूर्ण कर्ज मुक्ति, बिजली विधेयक 2025 व स्मार्ट मीटर की वापसी, मजदूर विरोधी व पूंजीपति परस्त चार श्रम संहिताओं की वापसी, बीज विधेयक 2025 को निरस्त करने, गन्ने का मूल्य 500 रूपए प्रति क्विंटल करने सहित किसानों मजदूरों से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर ऐतिहासिक किसान आन्दोलन की पांचवीं वर्षगांठ पर संयुक्त किसान मोर्चा ने तहसील सदर पर धरना प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि पिछले पांच वर्षों से अपनी लम्बित मांगों को लेकर किसान संयम पूर्वक सरकार द्वारा आश्वासन पूरा करने की प्रतीक्षा कर रहे थे लेकिन सरकार की गलत नीतियों ने कृषि आत्मनिर्भरता और देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर किया है। प्रधानमंत्री द्वारा 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा झूंठा साबित हुआ है। उत्पादन लागत दोगुनी हो गई है। कृषि क्षेत्र का संकट गहराता जा रहा है जिससे किसान शहरों की तरफ पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। कहा गया कि मोदी सरकार के ग्यारह वर्षों के शासन में किसानों का कर्ज एक रूपया भी माफ नहीं किया गया लेकिन पूंजीपतियों के सोलह लाख करोड़ रुपए माफ कर दिए गए। उर्वरक सब्सिडी का बजट लगातार कम किया जा रहा है।
खाद का दाम लगातार बढ़ता जा रहा है और पचास किलो बोरी की जगह पैंतालीस कर दिया गया। ज्ञापन में सरकार द्वारा श्रमिकों पर हमलों की बोछार की निन्दा करते हुए हाल में अधिसूचित चार श्रम संहिताएं जो मजदूरों को गुलाम बनाएंगी को तुरंत वापस लिए जाने की मांग की, इसके साथ साथ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण को समाप्त करने, संगठित क्षेत्र में सुरक्षित स्थायी रोजगार देने, न्यूनतम वेतन 26000 रूपए देने तथा सभी श्रमिकों सहित कृषि मजदूरों को दस हजार रुपए मासिक पेंशन और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई है।
धरने की अध्यक्षता मोर्चे के संयोजक मया राम वर्मा तथा संचालन विनोद सिंह किया। धरने में हुई सभा को किसान सभा के प्रदेश सचिव अशोक कुमार तिवारी, भाकपा माले जिला प्रभारी अतीक अहमद, माकपा जिला सचिव अशोक यादव, किसान सभा के जिला सचिव मया राम वर्मा, मजदूर नेता शैलेन्द्र प्रताप सिंह, भाकियू नेता कमला प्रसाद बागी, पूर्व प्रधान स्वामी नाथ पटेल, विष्णुदेव वर्मा, बाबूराम यादव, ओमप्रकाश यादव, दृगपाल वर्मा, आशीष पटेल, चित्रसेन पाल, मैनुद्दीन, सुभाष वर्मा आदि नेताओं ने सम्बोधित किया।