ओसीडी एक आवेशी मनोविकार : डा. आलोक मनदर्शन

by Next Khabar Team
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-छठे राष्ट्रीय समाज कार्य सप्ताह के अंतर्गत कार्यशाला का आयोजन

अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग में कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह के निर्देशन के तहत छठे राष्ट्रीय समाज कार्य सप्ताह 2025 के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन विभाग में किया गया। कार्यशाला के मुख्य वक्ता मनो चिकित्सक डॉ. आलोक मनदर्शन ने बताया कि ओसीडी (आब्सेसिव कम्पल्सिव डिस ऑर्डर) एक आवेशी-मनोविकार है।

आब्सेशन का मतलब है, किसी नकारात्मक विचार की असामान्य पुनरावृत्ति जो उलझन व बेचैनी पैदा करती है। इन नकारात्मक विचारों के आवेश से छुटकारा पाने की जुगत में बारंबार किए जाने वाले असामान्य कृत्य को कंपल्शन कहा जाता है।ओसीडी के कई प्रकारों में कंटामिनेशन ओसीडी, परफेक्शन ओसीडी, डाउट एंड हार्म ओसीडी व फोरबिडेन थॉट्स, ओसीडी प्रमुख हैं। कंटामिनेशन ओसीडी में साफ-सफाई का आब्सेशन होने के कारण हद से ज्यादा साफ-सफाई के लक्षण दिखते हैं जिसका फोकस शरीर, कपड़े, कमरे, घर, ऑफिस, सोफा व बिस्तर आदि हो सकते हैं। चीजें अति सलीके से रखने का भी जूनून दिखता है।

डाउट एंड हार्म ओसीडी में दिमाग में बार-बार संदेही विचार आते हैं जिनमें दरवाजे, सिलेंडर, बिजली उपकरण आदि खुले रह जाने का भय और फिर फिर चेक-रिचेक का कंपल्शन। फारबिडेन-थॉट्स ओसीडी या निषेध-विचार आशक्ति में कुछ गलत या अशुभ होने के अलावा धर्म, संस्कार, नैतिकता व संस्कृति आदि के विरूद्ध भी अनचाहे विचार आ सकते हैं। ओसीडी के साथ सोशल-फोबिया, क्लास्ट्रोफोबिया,अगोराफोबिया, जनरलाइज्ड-फोबिया, परफारमेंस-फोबिया तथा पैनिक-अटैक या तीव्र- घबराहट के दौरे के लक्षण सहित मनोशारीरिक या साइकोसोमैटिक असर भी दिख सकते हैं।

ओसीडी के प्रति जागरूकता व मनोअंतर्दृष्टि से अनचाहे नकारात्मक विचारों की ओसीडी मनोरोग रूप में पहचान तथा आवेशी- बाध्यता क्रिया यानि कम्पल्सिव-बिहैवियर पर क्रमिक-लगाम का अभ्यास अति प्रभावी है, जिसे ईआरपी यानि एक्सपोजर एंड रेस्पॉन्स प्रिवेंशन थिरैपी कहा जाता है। एंटी-ऑब्सेसिव व एंग्जाइटी-रोधी दवाओं का भी अहम रोल है।

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कार्यशाला का संचालन समाज कार्य विभाग के समन्वयक डॉ दिनेश कुमार सिंह ने किया डॉ सिंह ने समाज कार्य सप्ताह 2025 के विषय में बताया कि इस सप्ताह के अंतर्गत संपूर्ण भारत के समाज कार्य संस्थानों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। धन्यवाद ज्ञापन स्वतंत्र त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. प्रभात सिंह, पल्लव पाण्डेय, सीमा तिवारी प्रशांत सिंह, अनुभव तिवारी सेजल पाण्डेय, सुनंदा सोनी, मनप्रीत कौर, सत्यम, आंचल दुबे, सोनाली सिंह, निधि गौतम और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।

 

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