-खेत रुंधने हेतु 13 वर्षीय बालक ले जा रहा था बेर का कांटा, न्याय की आस में मासूम के साथ भटक रही बेटे की मां
मिल्कीपुर। खंडासा थाना क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत मितौरा के बिजुलिया डीह गांव में गोबर का कंडा टूट जाने की मामूली सी बात को लेकर दबंगों द्वारा मां बेटे की बर्बरता पूर्वक पिटाई किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। घटना के बाद पीड़ित मां ने पुलिस को मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने हेतु तहरीर दी किंतु पुलिस ने तत्काल मुकदमा अलबत्ता घायल मां बेटे को चिकित्सीय परीक्षण हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खंडासा भेज दिया। घटना के तीन दिन बीत जाने के बावजूद भी पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही न किए जाने के चलते न्याय की आस में पीड़ित मां बेटे के साथ थाने का चक्कर काट रही है।
महिला कुसुम ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि उनका 13 वर्षीय बेटा विपिन बीते 6 जनवरी को खेत को मवेशियों से बचाने हेतु बेर का कांटा लेकर बाड़ लगाने जा रहा था चक मार्ग पर गांव के ही राम जी अमन एवं ननकू के परिवार द्वारा गोबर का कंडा बना कर अवैध कब्जा कर लिया गया है। बेर के कांटों के चपेट में आकर उनका कुछ कंडा टूट गया था। इसी बात की खोलने को लेकर 7 तारीख को जब उनका बेटा शौच के लिए गया था। तभी उसे रास्ते में श्यामादेवी, नीलम मनीषा और नेहा ने रोक लिया था और उसकी डंडों से जमकर पिटाई शुरू कर दी थी।
हल्ला गुहार सुनकर मां कुसुम भी मौके पर पहुंची तब उपरोक्त लोगों ने उन्हें भी जमकर पीटा गांव वालों के बीच बचाव के बाद मां बेटे की किसी तरह जान बची और वह तहरीर लेकर खंडासा थाने पर पहुंचे पुलिस ने घायल मां बेटे को इलाज के लिए सीएचसी खंडासा भेज दिया और मुकदमा दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा। घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने आज तक मामले में कोई भी कार्यवाही नहीं की जिसके चलते पीड़ित मां मासूम के साथ दर दर भटकने को विवश है।
मामला मीडिया के संज्ञान में आने के बाद शनिवार को थाने से पुलिस कर्मी पीड़ित के घर पहुंचे और उल्टे मां बेटे पर सुलह समझौता का दबाव बनाने लगे। मामले में जानकारी हेतु थानाध्यक्ष खंडासा के सीयूजी मोबाइल नंबर मोबाइल नंबर पर फोन कर जानकारी किए जाने पर किसी अन्य पुलिसकर्मी ने फोन उठाया और कहा कि और कहा कि साहब अभी व्यस्त हैं, बाद में बात हो पाएगी। इस तरह से महिला संबंधी अपराधों में भी खंडासा पुलिस उदासीन है, जिसके चलते दबंगों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।