अस्थिर मनोदशा है, द्विध्रुवी-विकार की दिशा : डा. आलोक मनदर्शन

by Next Khabar Team
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-बाइपोलर-डिसऑर्डर लाता है व्यापक कहर, मूड-विकार का करें सम्यक उपचार

अयोध्या। द्विध्रुवी-विकार से ग्रसित रहे महान चित्रकार विंसेंट वान गॉग के जन्मदिन 30 मार्च पर द्विध्रुवी-विकार ( बाइपोलर डिसऑर्डर) दिवस मनाया जाता है। कई महान नेता, कलाकार, वैज्ञानिक, खिलाड़ी व अन्य प्रमुख हस्तियों इस विकार से ग्रसित रहीं। मनोचिकित्सक के पास आने वाले मरीजों मे बीस से तीस प्रतिशत मरीज इस विकार से ग्रसित होते हैं ।

द्विध्रुवी-विकार वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है, क्योंकि यह व्यक्तिगत ही नहीं बल्कि परिवार,समाज,देश व दुनिया के लिये भी संकटकारी होता है। यह विकार मूड-विकार की श्रेणी मे आता है। इसके तीन मुख्य प्रकार बाइपोलर-वन, बाइपोलर-टू तथा साइक्लोथीमिया हैं। पहले रूप में उन्माद, दूसरे में अवसाद व तीसरे में रैपिड मूड-स्विंग की प्रमुखता होती है। उन्माद अवस्था में व्यक्ति अत्यधिक प्रसन्न्,अति शक्तिशाली व सर्वश्रेष्ठता अनुभव कर सकता है।

नींद बहुत कम तथा विचार तीव्र, उग्र व हवा- हवाई होते है। इस मूड में व्यक्ति अपनी मनोस्थिति को सही मानकर उपचार में सहयोग नहीं करता। इनमे नशाखोरी, अय्याशी व जुआ की प्रवृत्ति भी दिख सकती है। द्विध्रुवी मूड के दूसरे रूप अवसाद में निराशा,थकान, उदासी ,अरुचि, सामाजिक अलगाव के भाव दिखते है।

बाइपोलर डिसऑर्डर या द्विध्रुवी विकार के उपचार में मूड-स्टेबलाइजर, एंटीसाइकोटिक्स व एंटीडिप्रेसेंट्स दवाओं के साथ व्यवहार उपचार व फैमिली काउंसलिंग अत्यंत उपयोगी है। वर्ल्ड बाइपोलर-डिसऑर्डर डे जागरूकता वार्ता में यह जानकारी जिला चिकित्सालय के मन-कक्ष में आयोजित वार्ता में डा आलोक मनदर्शन ने दी।

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