’गड़बड़ सॉफ्टवेयर बनता है मेन्टल-डिसऑर्डर, शर्म व संकोच हैं मनोउपचार के अवरोध : डा. आलोक मनदर्शन

अयोध्या। ओवर-थिंकिंग या अनचाहे नकारात्मक विचारों से ग्रसित रहने से स्ट्रेड हार्मोन कार्टिसाल व एड्रेनिल बढ़ कर घबराहट, भय,अनिद्रा,हृदय की असामान्यत अनुभूति, पेट खराब रहना,शरीर दर्द व थकान,सरदर्द,किसी बड़ी बीमारी होने का भय,ओसीडी यानि अति साफ-सफाई व किसी कार्य को बार-बार करना, बेवजह की जांच व डॉक्टर सलाह आदि लक्षण भी दिख सकते हैं ।
मनोद्वंद की स्थिति मे शारीरिक सुन्नता, बोल न पाना, आँख न खोल पाना, ऐंठन, बेहोशी, सांस का तेज चलना, भूत-प्रेत प्रदर्शन आदि लक्षण भी दिखते हैं। मूड-स्टेबलाइज़र हार्मोंन सेरोटोनिन की कमी से ब्रेन-सॉफ्टवेयर बिगड़ जाने से एंग्जाइटी-डिसऑर्डर व मनोशारीरिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। साथ ही हैप्पी हार्मोन डोपामिन, ऑक्सीटोसिन व इंडॉर्फिन की कमी हो जाने से नीरसता,उदासी व हताशा होने लगती है जो अवसाद की तरफ ले जाते हैं ।
पर्सनालिटी डिसऑर्डर,जीवन के सदमे,नशाखोरी, फैमिली-प्रॉब्लम व मनो रोग की फैमिली-हिस्ट्री के अलावा डिजिटल-एडिक्शन, ऑनलाइन गेमिंग, गैंबलिंग,डेटिंग, लव-कांफ्लिक्ट तथा मनो सलाह से शर्म व संकोच आग में घी का कार्य करते हैं। एंटी-एंग्जायटी व सेरोटोनिनवर्धक दवाओं के साथ काग्निटिव बिहियर थिरैपी उपचार मे अति कारगर है। विश्व महिला दिवस श्रृंखला कार्यक्रम के अंतर्गत 14 राजपूत रेजीमेंट सभागार में मनोस्वास्थ्य जागरूकता व्याख्यान के मुख्य वक्ता डा आलोक मनदर्शन ने यह बातें कही। कमांडेंट ब्रिगेडियर निशांत सैनवाल के निर्देशन व लेफ्टीनेंट कर्नल एस के सिंह के संयोजन में आयोजित इस सत्र की अध्यक्षता मीनाक्षी सैनवाल व धन्यवाद ज्ञापन प्रियंका सिंह ने किया। सत्र में उपस्थित सैन्य परिवारों का नैदानिक मनोसाक्षात्कार भी किया गया।