-पैनिक-होर्डिंग बढ़ाती है जरूरतमन्द की परेशानी, जागरूकता से सम्भव है अफवाहरोधी सफलता
अयोध्या। पिछले दिनों पेट्रोलियम संकट की अफवाह से पैनिक-बाइंग की मनो दशा से पेट्रोल पम्पों पर अनियंत्रित भीड़ के रूप में एक बार फिर मास-हिस्टीरिया या समूह-बुद्धिहीनता का दृश्य देखने को मिला। वैसे तो मास-हिस्टीरिया या भेड़-चाल के विभिन्न रूप समय-समय पर दिखते रहते है। हाल ही में ड्रोन दिखने व चोरों के गिरोह के सक्रिय होने की अफवाह से लेकर मुंह नोंचवा, चोटी कटवा, नमक संग्रह, कच्छा बनियान रूपी सनसनी भी इसके उदाहरण हैं । भयाक्रांत-अफवाह से एंक्शस-पर्सनालिटी या चिंतालु-व्यक्तित्व आसान शिकार बनते हैं और फिर ये लोग सेकेंडरी अफवाह स्रोत बन मास-हिस्टीरिया का हिस्सा बनते हैं।वास्तविक जरूरतमंद के लिये जमाखोरी सबसे अधिक घातक होती है।
अफवाह का मनोविज्ञानः
सोशल साइकोलॉजिस्ट अलपोर्ट के अनुसार अफवाहें फैलाने या गप्पबाज़ी में शामिल होने के प्रमुख कारकों में लोगो के साथ घुलने-मिलने, विशेष महसूस करने या दूसरों को प्रभावित करने या निहितार्थ सिद्ध करने ,आत्ममुग्धता, खुद की चिंताओं से ध्यान हटाने, अफवाह चर्चा से लोगों में स्वीकार किए जाने, ध्यानाकर्षण, सामाजिक स्तर पर लोकप्रियता आदि की मनोमनोवृत्ति होती है।
सुझावः
अफवाह या गप्पबाज़ी समाज मनोविज्ञान का एक ऐसा पहलू है जो समाज में व्याप्त कुंठा, हताशा,भय,द्वंद आदि को आभासी रूप में व्यक्त करता है ,क्योंकि इससे उत्तेजना हार्मोन एड्रेनलिन व तनाव को बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टिसोल में वृद्धि होती है। इस प्रकार अफवाह जन्य समूह-मनोविकृति या मास-हिस्टीरिया डिसोसिएटिव डिसऑर्डर, चिंता-विकार आदि में वृद्धि करती है। एंटीसोशल-पर्सनालिटी के लोग प्राथमिक अफवाह-स्रोत होते हैं।
जिला चिकित्सालय के माइंड-मेंटर डा आलोक मनदर्शन ने सामयिक पेट्रोलियम होर्डिंग- हिस्टीरिया या पैनिक-बाइंग संदर्भित जागरूकता वार्ता में यह जानकारी दी।