-एमबीए विभाग के नवप्रवेशी विद्यार्थियों का हुआ दीक्षारंभ समारोह
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंधन एवं उद्यमिता विभाग में एमबीए, बीबीए, बीसीए व बीकाम के नवप्रवेशी विद्यार्थियों का दीक्षारंभ समारोह आयोजित किया गया। स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित कार्यक्रम में नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने कहा कि यह यात्रा अंधकार से प्रकाश की ओर की है। उन्होंने कहा कि भगवान राम त्याग, समर्पण और अर्पण के साथ प्रबंधन के भी सबसे बड़े प्रतीक हैं। वनवास के दौरान जब वह चित्रकूट गए तो लोगों से पूछा क्या करते हो।
लोगों ने उत्तर दिया कि दिन भर पाप कर्म करते हैं फिर भी भूखे पेट ही सोना पड़ता है। इसके बाद भगवान राम ने वहीं डेरा डाल दिया और लोगों को जीने की राह दिखाई। अब अयोध्या, मथुरा, काशी, वृंदावन स्वरोजगार के प्रतीक हैं। रोटी तीन प्रकार की होती है। ममता, धर्म और कर्तव्य की। एमबीए करके विदेश चले गए तो ममता और धर्म की रोटी छूट जाएगी। उन्होंने अपील किया कि विद्यार्थी उद्यमिता अवश्य से जुड़े। इंडो गल्फ मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. मोहन अग्रवाल ने विद्यार्थियों को अपने काम के प्रति जुनून विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने डा. वर्गीज कुरियन, धीरूभाई अंबानी, नारायण मूर्ति का उदाहरण दिया कि रितेश अग्रवाल 30 वर्ष की उम्र में आज होटल इंडस्ट्री पर राज कर रहे हैं।
इतनी कम उम्र में ओयो की शुरुआत कर होटल इंडस्ट्री की दिशा-दशा बदलकर रख दी। उद्यमी ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाएंगे। इस्कान के देवशेखर ने कहा कि सिर्फ प्रवेश लेने से कुछ नहीं होगा, बल्कि कौशल विकसित करना होगा। संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र वर्मा ने विषय प्रवर्तन किया। प्रो. हिमांशु शेखर सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा लाखों वर्ष पुरानी है। दादी-नानी की कहानियों में भी बहुत कुछ ज्ञान रहता था। जीवन को दो भागों में बांटना चाहिए।
जीवन को 25-25 की उम्र में बांटना चाहिए। शुरुआती 25 वर्ष में मेहनत करेंगे तो बाद के 25 वर्ष सुख से बीतेंगे। डा. महेंद्र पाल व डा. निमिष मिश्रा ने विवि और विभाग की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डा. राकेश कुमार व अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापन डा. आशुतोष पांडेय ने किया। डा. प्रवीण राय ने विद्यार्थियों को विवि परिसर का भ्रमण कराया। इससे पहले विद्यार्थियों ने कुलगीत की प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर डा. कपिलदेव चौरसिया, डा. दीपा सिंह, डा. अंशुमान पाठक, डा. अनुराग तिवारी, डा. संजीत पांडेय, डा. सूरज सिंह, डा अनीता मिश्रा आदि उपस्थित रहे।