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कृषि विवि को ढर्रे पर लाने में सफल रहे प्रो. जे.एस. संधू

15वें नियमित कुलपति का एक वर्ष का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा रहा

कुमारगंज। नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के 15वें नियमित कुलपति प्रो0 जे0एस0 सन्धू के कार्यकाल का प्रथम वर्ष उनके लिये व्यक्तिगत व विश्वविद्यालय के लिये उपलब्धियों भरा रहा। प्रो0 जे0एस0 सन्धू ने दिनांक 20 फरवरी, 2018 को कुलपति के रूप में अपना कार्यभार ग्रहण किया था। कठिन चुनौती की परिस्थितियों से गुजर रहे विश्विद्यालय के पहले वर्श में ढर्रे पर लाने में सफल कुलपति प्रो0 सन्धू कठिनाईयों से बाहर निकल कर विश्वविद्यालय को नई-दिशा देने में कामयाब हो गये हैं। विगत् वर्षों से कृषि महाविद्यालय आजमगढ़ परिसर तथा पशुचिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय के लिये स्वीकृत शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का प्रकरण हो या फिर विश्वविद्यालय के अधीन सृजित नये कृषि विज्ञान केन्द्रों के लिये स्वीकृत पदों का मामला हो ये सभी द्रुतगति से पूरे किये जा चुके हैं या फिर प्रक्रिया के अन्तिम पड़ाव पर हैं। ये वे प्रकरण है जिन्हें पूर्व कुलपति निस्तारित करने में पूरी तरह अक्षम रहे थे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद विवि की ग्रेडिंग व नैक मूल्यांकन में वर्श 2017 में की गयी प्रक्रिया के बाद अव्यवस्थाओं के परिणाम स्वरूप असफलता हाथ लगी थी। इसके पीछे शैक्षणिक व शिक्षणेत्तर कर्मियों की मानक के सापेक्ष कमी होना व एक विश्वविद्यालय के स्तर के अनुरूप प्रयोगशालाओं आदि का निम्न स्तर नैंक मूल्यांकन की ग्रेडिंग हासिल करने में मुख्य बाधा थी परन्तु सकारात्मक सोच, कृषि शिक्षा के राश्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय प्रशासन पर पकड़ एवं विशाल अनुभव का परिणाम रहा है कि अगली पायदान में इस विष्वविद्यालय को नैंक मूल्यांकन में बेहतर ग्रेडिंग हासिल हो जाने के प्रति लोगों में काफी उत्साह है। कुलपति प्रो0 जे0एस0 सन्धू के विभिन्न पटलों पर प्रजेन्टेशन का परिणाम रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस कृषि विश्वविद्यालय को केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाये जाने हेतु प्रस्ताव भी विगत् दिनों मांग किया है। पिछले एक वर्श की ये ऐसी गतिविधियॉं हैं जिन्होने फिलहाल पूर्वांचल के सबसे बड़े कृषि विश्वविद्यालय को शून्य से शिखर की यात्रा के पहले पड़ाव तक बड़ी सहजता से पहॅुचा दिया है। एक तरफ जहॉं विवि में बाह्य संस्थाओं से संचालित परियोजनायें विगत् एक वर्श पूर्व तक लगातार बन्द होती जा रही थी तो वहीं अब परियोजनाओं की स्वीकृति वियवविद्यालय के पक्ष में लगातार भारत सरकार व प्रदेश सरकार की संस्थाओं से किये जाने की होड़ लगी हुयी है। विष्वविद्यालय में प्रदेश का पहला सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स आन पोटैटो स्थापित किये जाने का निर्णय हो चुका है वहीं दूसरी तरफ बाह्य संस्थाओं विश्वविद्यालय से अनुबन्ध कर विद्यार्थियों व वैज्ञानिकों के शोध कार्याे में सहयोग के लिये आतुर हैं। आर्थिक क्षेत्र में सौर ऊर्जा व परिसर में वाई-फाई सुविधा के लिये रिलायन्स जैसी कम्पनी के साथ अनुबन्ध के परिणाम भी अब सफलता पूर्वक सामने है विवि में सौर ऊर्जा से बिजली सप्लाई के प्रथम चरण का कार्य पूरा हो चुका है। कुलपति प्रो0 सन्धू ने दशकों से कुण्ठा में जी रहे विश्वविद्यालय के उन शिक्षकों व वैज्ञानिकों के असेसमेंट का कार्य करके कार्य संस्कृति को सुधारने का सफल प्रयास किया साथ ही ऐसे शिक्षकों व वैज्ञानिकों को एक कठोर सन्देश भी दिया है जो अपने कार्यों के प्रति लापरवाह थे। अपने कार्यकाल का प्रथम वर्ष पूर्व होने के साथ कुलपति प्रो0 सन्धू ने कहा कि चुनौतियॉं अभी कम नहीं है। विश्वविद्यालय के कर्मियों में विश्वविद्यालय के प्रति उनकी जिम्मेदारी का भाव शत-प्रतिशत जगाना होगा तभी हम केन्द्र व प्रदेश सरकार की इच्छा पूरी कर सकेंगे। विष्वविद्यालय को देष के प्रथम 10 कृशि विश्वविद्यालयों की श्रेणी में लाने शोध, शिक्षा व प्रसार की उच्च गुणवत्ता के साथ-साथ कम से कम विवि के कार्यक्षेत्र के जनपदों के किसानों की आय को दोगुनी करने से लेकर उनके आर्थिक उन्नयन को बढ़ाना हमारी प्राथमिकता होगी। कुलपति ने विवि को गतिमान करने के लिये प्रदेश सरकार व षासन से लगातार मिल रहे सहयोग के प्रति भी अपना आभार व्यक्त करते हुए अपने एक वर्ष के कार्यकाल की सफलता को विवि कर्मियों को सामूहिक सहयोग को श्रेय दिया है।

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