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संकटमोचन मंदिर में चतुर्मास अनुष्ठान का शुभारंभ

-चतुर्मास का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्त्व : रामदास

अयोध्या। भारतीय संस्कृति सदा से ही सनातन धर्म से प्रभावित रही है और सनातन धर्म में चातुर्मास को विशेष महत्व दिया गया है और यह चतुर्मास बरसात के 4 महीने को कहते हैं लेकिन इस वर्ष अधिक मास लगेगा इसलिए चतुर्मास 5 महीने का हो जाएगा और अयोध्या के बाईपास स्थित सिद्ध पीठ संकटमोचन मंदिर मंदिर के पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास महाराज के संयोजन में संतो ने चतुर्मास अनुष्ठान का शुभारंभ ज्येष्ठ पूर्णिमा पर किया और आज से 4 महीने तक अयोध्या और राजस्थान के संत आश्रम में रहकर के भजन पूजन और दर्शन करेंगे।

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इस अवसर पर मंदिर में अखंड मानस पाठ का भी शुभारंभ किया गया जो अनवरत पूरे चतुर्मास तक चलता रहेगा।
राजस्थान से श्रीधाम अयोध्या के सिद्ध पीठ संकट मोचन हनुमान किला में चतुर्मास संपन्न करने के पधारे 95 वर्षीय संत श्री श्री 108 श्री महंत रामदास महाराज ने बताया कि चतुर्मास का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों महत्त्व है क्योंकि यह महीना वर्षा ऋतु का होता है लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान में जाने से कठिनाई होती है इसी कारण से संतो ने सभी को चतुर्मास में एक स्थान पर रह कर के जगत कल्याण के लिए भजन करने का नियम बनाया।

जो मैं जीवन भर पालन करते हुए अन्य अन्य स्थानों पर चतुर्मास में भजन तपस्या सत्संग करता आ रहा हूं और इस वर्ष संतो के साथ श्री राम लला की कृपा से अयोध्या में करने का अवसर प्राप्त हुआ। इस अवसर पर खाक चौक के बड़े पुजारी महंत राम चरण दास,राजस्थान जयपुर केलकी बगीची से पधारे श्री महंत राम रतन दास,राजस्थान से ही महंत श्याम दास, महंत सुमिरन दास, महंत श्यामसुंदर दास, महंत राम नरेश दास के साथ अयोध्या से महंत विजय रामदास, मानस दास, महंत रामाज्ञा दास महंत धर्मदास सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर कन्हैया लाल पोद्दार की स्मृति में विनीत पोद्दार और गोलू पोद्दार ने भी सेवा प्रदान की।

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