-यौन उत्पीड़क होते है मनोविकृति ग्रसित, यौन उत्पीड़ित हो सकता है मनोआघात ग्रसित
अयोध्या। साइकोपैथिक या नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी या यौन-विकृति से ग्रसित लोग ही यौन उत्पीड़न के कृत्य करते है। ये परपीड़क,आक्रामक, दुस्साहसी, निर्दयी और ग्लानिहीन व संवेदनहीन होते हैं । ऐसे लोग आवेगपूर्ण और अवसरवादी होते हैं। बच्चो के यौन शोषण की मनोविकृति को पीडोफिलिया तथा बड़ों द्वारा विपरीत लिंग के अंत अंगों को स्पर्श करने को फ्राट्युरिज्म तथा चोरी छिपे देखने की लत को वायुरिज्म कहते है।
यौन शोषित व्यक्ति मनोआघात से ग्रसित हो सकता है जिससे वह भय, शर्म, ग्लानि व प्रतिशोध व अवसाद के मनोभाव से ग्रसित हो सकता है । यह बातें डा राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के उद्यमिता व व्यवसाय प्रबंधन विभाग में आयोजित मेंटल हेल्थ एन्ड सेक्सुअल एब्यूज विषयक कार्यशाला में जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन ने कही।
उन्होंने सलाह दी कि ज्यादातर यौन उत्पीड़न करने वाले लोग अजनबी नही बल्कि सहकर्मी या परिचित होते है । अश्लील चैटिंग,पोर्नोग्राफिक-कंटेंट साझा करना, अश्लील इशारे व व्यंग्य, अशोभनीय मजाक, रास्ते में पीछा करना, चोरी-छिपे ताक-झाँक, गुप्त वीडियो या फोटो लेना, बैड-टच, बॉडी-शेमिंग आदि कृत्य यौन-उत्पीड़न की श्रेणी में आतें हैं।
यौन-उत्पीड़न की रोकथाम व निवारण के लिये पीओएसएच-प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल-हरासमेंट ऑफ वीमेन इन वर्क-प्लेस एक्ट -2013 लागू किया गया। यौन-उत्पीड़न के प्रमुख हथकंडो में यौन-रिश्वत यानि लालच देकर उत्पीड़न व यौन-भयादोहन यानि डरा धमकाकर उत्पीड़न प्रमुख हैं। व्यक्तित्व-विकार, मूड-विकार, नशा-विकार व अन्य मनोसामजिक विकृति से ग्रसित लोगों में यौन-उत्पीड़न की मनोवृत्ति होने की सम्भावना अधिक होती है। कार्यमक्रम की अध्यक्षता प्रो शैलेन्द्र वर्मा तथा संयोजन प्रो राकेश कुमार ने किया।