संवर रहा गुप्तार घाट, त्रेता युग की दिव्यता से सजेगा गुप्तार पार्क

by Next Khabar Team
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-नई झील लगाएगी चार चांद, 842.26 लाख रुपये की लागत से चल रहा निर्माण कार्य

अयोध्या। गुप्तार घाट अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रामायणकालीन आस्था और आधुनिक पर्यटन के समन्वय का जीवंत प्रतीक बनता जा रहा है। त्रेता युग में भगवान श्रीराम की मर्यादित जीवन-लीला से जुड़ा यह पावन स्थल आज योगी सरकार के प्रयासों से नए वैभव की ओर अग्रसर है। जिस धरती पर प्रभु श्रीराम ने मानव रूप में अपने अवतार की लीला पूर्ण की, वही गुप्तार घाट अब श्रद्धा, संस्कृति और सौंदर्य का संगम बन रहा है। इसी कड़ी में स्थित गुप्तार पार्क को भी नए स्वरूप में संवारा जा रहा है।

यहां विकसित की जा रही झील, हरित लैंडस्केपिंग और आधुनिक सुविधाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों को त्रेता युग की अनुभूति के साथ प्रकृति के सान्निध्य में ठहरने का अवसर देंगी। योगी सरकार के सतत प्रयासों से अयोध्या का यह हिस्सा वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाएगा, जहां राम की स्मृति, सरयू की शांति और आधुनिक विकास का अनुपम संगम देखने को मिलेगा। परियोजना पूर्ण होने पर गुप्तार घाट अयोध्या के पर्यटन मानचित्र में एक नए अध्याय के रूप में जुड़ जाएगा। रामनगरी अयोध्या में सरयू नदी के तट पर स्थित गुप्तार पार्क का सौंदर्यीकरण कार्य जोरों पर है।

योगी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत राजकीय उद्यान विभाग द्वारा 842.26 लाख रुपये की लागत से कंपनी गार्डन क्षेत्र में कृत्रिम झील सहित व्यापक विकास कार्य कराया जा रहा है। राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा संचालित यह परियोजना मई तक पूरी होने की संभावना है। इसके पूर्ण होते ही यहां का दृश्य ऐसा होगा, मानो त्रेता युग की दिव्यता आधुनिक स्वरूप में साकार हो उठी हो, जहां हर कोना रामकथा की स्मृतियों से जुड़ा प्रतीत होगा।

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योगी सरकार का लक्ष्य अयोध्या को केवल धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि वैश्विक आध्यात्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसी सोच के तहत गुप्तार घाट को विशेष महत्व दिया गया है। विभिन्न चरणों में चल रहे विकास कार्यों से इस ऐतिहासिक घाट का कायाकल्प हो रहा है और श्रद्धालुओं को पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक और दिव्य अनुभव मिल रहा है।

भगवान राम से जुड़ा तीर्थ स्थल है गुप्तार घाट

गुप्तार घाट का पौराणिक महत्व अत्यंत गहन और भावनात्मक है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने यहीं सरयू नदी में जल समाधि लेकर अपने अवतार की लीला पूर्ण की थी। ‘गुप्तार’ शब्द का अर्थ ही गुप्त रूप से वैकुंठ गमन से जुड़ा है। धार्मिक ग्रंथों में इसे गोप्रतार तीर्थ अथवा गुप्त हरि स्थान के नाम से भी जाना गया है। कहा जाता है कि यहां स्नान, ध्यान और दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है। घाट पर स्थित राम-जानकी मंदिर, चरण पादुका, नरसिंह मंदिर, हनुमान मंदिर और गुप्त हरि मंदिर श्रद्धालुओं को त्रेता युग की घटनाओं से जोड़ते हैं। 19वीं शताब्दी में राजा दर्शन सिंह द्वारा पुनर्निर्मित यह घाट आज भी अपनी शांत, आध्यात्मिक और प्राकृतिक छटा के लिए प्रसिद्ध है।

कृत्रिम झील पर है मुख्य फोकस

राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड के सहायक अभियंता संजय सिंह के अनुसार, वर्तमान परियोजना में कृत्रिम झील मुख्य आकर्षण होगी। यह झील न केवल सौंदर्य बढ़ाएगी, बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को योग, ध्यान और आत्मिक शांति का विशेष अनुभव देगी। सरयू तट के समीप विकसित यह जल संरचना त्रेता युग की तपोभूमि की भावना को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करेगी।

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जानिए, क्या हुआ, क्या काम बाकी

गुप्तार पार्क में बाउंड्री वॉल पुट्टी, पाथवे का निर्माण प्रगति पर है। कार्यालय, गार्ड रूम, टिकट काउंटर, मीटर रूम एवं शौचालयों में फिनिशिंग का कार्य चल रहा है। गजिबो और योगा शेड की पेंटिंग जारी है। स्थल विकास, लैंडस्केपिंग और विद्युतीकरण का कार्य भी तेजी से हो रहा है। झील के आरसीसी वॉल एवं ब्रिज का निर्माण प्रगति पर है। फाउंटेन और कैंटीन की मरम्मत की जा रही है। मुख्य गेट फिनिशिंग स्तर पर है, वहीं वाटर बॉडी टैंक का डिस्मेंटलिंग कार्य जारी है। वृहद लाइट और हाईमास्ट लाइट के लिए स्थल चयन पूर्ण हो चुका है।

और आकर्षक बनेगा पार्क

जिला उद्यान अधिकारी अरुण तिवारी ने बताया कि यह परियोजना गुप्तार पार्क को आधुनिक सुविधाओं से युक्त आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है। बेहतर पाथवे, आकर्षक लाइटिंग, योग केंद्र, शेड और हरित क्षेत्र और भी आकर्षक बनाएंगे। आने वाले समय में यह पार्क श्रद्धालुओं को त्रेता युग की अनुभूति और आधुनिक सुविधा दोनों का अद्वितीय अनुभव प्रदान करेगा।

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