गेमिंग का नशा बन रही आत्मघाती मनोदशा : डा. आलोक मनदर्शन

by Next Khabar Team
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-डोपामिन हार्मोंन का श्राव लाता है मादक खिचाव, मनोउपचार से संकोच बन रहा खाज में कोढ़

अयोध्या। गेमिंग लत के चार प्रमुख लक्षण होतें हैं । पहला लक्षण गेमिंग में लिप्त या उसी ख्याल में रहना, दूसरा औसत एक्सपोजर समय बढ़ते रहना ,तीसरा तलब रोकने में बेचैनी तथा चौथा लक्षण लत पूरी न हो पाने तथा रोक टोक या बाधा होने पर क्रोधित या हिंसक हो जाना है। एकांकीपन, आत्मविश्वास में कमी, आक्रोशित व्यवहार, अवसाद, उन्माद जैसी रूग्ण मनोदशा भी इनमें पायी जाती है। यही मनोविकृति और गंभीर रूप ले लेता है जिसे अपोजिशनल डिफायन्ट डिसऑर्डर (ओ डी डी ) कहा जाता है। इसमें बड़ो द्वारा डांट फटकार की आक्रोशित प्रतिक्रिया घातक रूप में दिख सकती है।

कैसे पड़ती है लतः

ब्रेन रिवार्ड हार्मोन डोपामिन गेमिंग के रोमांचक अहसास के लिये जिम्मेदार है और फिर यह एहसास ब्रेन मेमोरी सेंटर हिप्पोकैंपस में सेव हो जाती है और यही से इसकी तलब पैदा होती है। तलब पूरी न होने पर बेचैनी व आक्रामकता के भाव पैदा होते है। यह वैसे ही है जैसे पारम्परिक नशे की लत पूरी न होने पर होता है जिसे विद्ड्राल सिंड्रोम और इस लत को डिजिटल ड्रग कहा जाने लगा है।

सलाह :

अभिभावक रोल मॉडलिंग करतें हुए पाल्य गतिविधियों पर मैत्रीपूर्ण व पैनी नजर रखे। पारिवारिक वातावरण को बेहतर बनाने की कोशिश करें तथा स्वस्थ मनोरंजक गतिविधियों को बढ़ावा दें। डिज़िटल डिटॉक्स और इंटरनेट फास्टिंग या मोबाइल से दूरी बनाने की मनोउपचार तकनीक से सुधार सम्भव है।आक्रामक व अन्य असामान्य व्यवहार को नज़र अंदाज़ न करें तथा मनोपरामर्श लेने में देरी न करें।
यह बातें जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डॉ आलोक मनदर्शन ने गाजियाबाद व भोपाल में घटी हृदय विदारक डिजिटल लत जनित किशोर आत्मघाती घटनाक्रम संदर्भित जागरूकता वार्ता में कही।

नेक्स्ट ख़बर

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