-मध्य प्रदेश के रीवा में रामकथा के दौरान बिगड़ी थी तबियत, इलाज के दौरान ली अन्तिम सांस
अयोध्या। राम मंदिर आंदोलन के प्रखर संत, श्री रामजन्म भूमि न्यास के सदस्य, धर्माचार्य और पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती का सोमवार को निधन हो गया। मध्यप्रदेश के रीवा में दोपहर 12ः20 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से अयोध्या समेत देशभर के संत-समाज और रामभक्तों में शोक की लहर दौड़ गई है। डॉ. वेदांती रीवा में रामकथा के लिए प्रवास पर थे।
इसी दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। बीते दो दिनों से उनका इलाज रीवा के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। सोमवार सुबह हालत और गंभीर हो गई। उन्हें एयरलिफ्ट कर भोपाल एम्स ले जाने की तैयारी की गई, एयर एम्बुलेंस भी पहुंच गई, लेकिन घने कोहरे के कारण लैंडिंग नहीं हो सकी। इसके बाद दोपहर में उनका निधन हो गया। महाराज जी का पार्थिव शरीर अयोध्या लाया जा रहा है। मंगलवार सुबह उनकी अंतिम यात्रा अयोध्या के हिंदू धाम से प्रारंभ होकर राम मंदिर तक जाएगी। इसके पश्चात सुबह 10 बजे सरयू तट पर उन्हें जल समाधि दी जाएगी।
डॉ. रामविलास दास वेदांती का जन्म 7 अक्टूबर 1958 को मध्यप्रदेश के रीवा जिले के गुढ़वा गांव में हुआ था। महज 12 वर्ष की आयु में वे अयोध्या आ गए थे और इसके बाद पूरा जीवन रामनगरी में ही व्यतीत किया। उन्होंने वाराणसी के संस्कृत विश्वविद्यालय से वेदान्ताचार्य विद्या वरिधि में पीएचडी (1983) की उपाधि प्राप्त की। वे दो बार सांसद रहे। 1996 में मछलीशहर और 1998 में प्रतापगढ़ से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर संसद पहुंचे। रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान उन्होंने कई बार जेल यात्रा भी की।
बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई द्वारा उन्हें आरोपी बनाया गया था, हालांकि 2020 में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें बरी कर दिया, अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि विध्वंस के पीछे कोई साजिश सिद्ध नहीं होती। डॉ. वेदांती सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर भी मुखर रहे। अयोध्या में मां बड़ी देवकाली की मूर्ति चोरी के मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में आयोजित सभा के दौरान मूर्ति बरामदगी के लिए शासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम देकर सुर्खियां बटोरी थीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके बेहद प्रगाढ़ संबंध रहे। कई मंचों से सीएम योगी ने उनके साथ आत्मीय अंदाज में हास-परिहास भी किया। मुख्यमंत्री बनने से पहले अयोध्या प्रवास के दौरान योगी आदित्यनाथ अक्सर वशिष्ठ भवन स्थित उनके आवास पर विश्राम करते थे। डॉ. रामविलास दास वेदांती ने हिंदू राष्ट्र और राम मंदिर के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनके निधन से अयोध्या ने एक ऐसा संत खो दिया, जिसने राम आंदोलन को जीवन का ध्येय बनाया।