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डिजिटल तकनीक से दूर होगी किसानों की समस्या : डॉ. बिजेन्द्र सिंह

-कृषि विवि में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ, कुलपति ने किया शुभारंभ

मिल्कीपुर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। “कृषि और संबद्ध विज्ञान में डेटा विश्लेषण और निर्णय लेने“ के विषय पर आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ विवि के कुलपति डा. बिजेंद्र सिंह ने दीप प्रज्जवलन कर किया। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक कुलपति डा. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि दिन प्रतिदिन कृषि उत्पादन में चुनौतियां बढ़ रहीं हैं और इससे निपटने के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीक को माध्यम बनाना होगा। ये भौतिक वातावरण की लगातार निगरानी करते हैं। उन्होंने कहा कि जटिल कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर ढंग से समझने की आवश्यकता है।

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आईसीआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. सुशील कुमार सरकार ने कहा कि व्यवहारिक फसल डेटा के साथ किसान उगाने के लिए फसल के प्रकार पर निर्णय ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसान एक ऐसी किस्म का चयन कर सकते हैं जो लाभदायक फसल बनाने के लिए वायुमंडलीय परिस्थितियों, बारिश के मौसम और मिट्टीके प्रकार के लिए सबसे उपयुक्त है। इसी क्रम में दिल्ली से आए डा. गौरव जोशी, आईसीएआर के वैज्ञानिक डा. राहुल बनर्जी ने भी डेटा प्रबंधन, वर्णनात्मक विश्लेषण आदि विषयों पर प्रशिक्षण दिया। यह कार्यक्रम नाहेप के वित्तीय सहयोग से आयोजित हुआ।

इस मौके पर विवि के समस्त अधिष्ठाता, निदेशक, शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। राष्ट्रीय कार्यशाला का संयोजन डा. सुप्रिया ने किया। कार्यक्रम का आयोजन अर्थशास्त्र एवं कृषि व्यवसाय प्रबंधन कृषि महाविद्यालय द्वारा किया गया।

वहीं कृषि महाविद्यालय में संचार कौशल, सॉफ्ट स्किल एवं व्यक्तित्व विकास विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कुलपति ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे वह जीवन में किसी भी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण में भाग लेने वाले विद्यार्थी न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं में पास होते हैं बल्कि साक्षात्कार आदि में भी सफलता हासिल करते हैं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ उमेश चंद्र व धन्यवाद ज्ञापन अधिष्ठाता डॉ प्रतिभा सिंह ने किया। कार्यशाला में 135 छात्र छात्राओं को कौशल विकास, बॉडी लेंग्वेज, रिसूम रीटिंग आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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