अवसर की समानता से होगा सभी का विकास : नवनीत पांडेय

अंतराष्ट्रीय बालिका दिवस पर हुआ युवाओं का संवाद

अयोध्या। अंतराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर अवध पीपुल्स फ़ोरम के ओर से संचालित समानता के साथी कार्यक्रम के तहत गाँधी पार्क, सिविल लाइन में युवाओं का एक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें फोरम से जुड़े समानता के साथी और स्वयंसेवी युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में की शुरुआत फोरम के साथी आशीष कुमार के गाने के साथ हुई। जिसको सभी साथियों ने गाना गया “सड़कों पे निकली हैं लड़कियां, डरने का डर नहीं“। अपनी बात रखते हुए युवा समानता के साथी नवनीत पांडेय ने कहा कि “लड़कियों को भी अगर सामान अवसर मिले तो वो कुछ भी कर सकती हैं। अवसर कि समानता से ही सबका विकास होगा। लड़कियों की आज़ादी पर अंकुश नहीं लगाना चाहिए। उनको इस समाज में पूरा अवसर आज भी देने पर समस्या हो रही है। जहाँ बालिकाओं को शिक्षा और काम का अवसर मिला उन्होंने बहुत बेहतर परिणाम दिया है। आज उनको कम समझना ख़ुद को कम अक्ल साबित करना हुआ। फ़ोरम के साथी मोहम्मद अली ने अपनी बात रखते हुए कहा कि “हमारे संविधान ने सबको बराबरी का अधिकार दिया है। इसलिए किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिये। सबको सामान अवसर और सबकी हिस्सेदारी होनी चाहिए। भ्रूण जाँच, भ्रूण हिंसा से लैंगिक अनुपात बिगाड़ रहा है। जो आज के विकलांग समाज की मानसिकता को उजागर करता है। एक स्वास्थ्य समाज स्वास्थ्य मस्तिष्क से ही चलता है। बच्चों को बच्चों की तरह से पालना चाहिए“। श्रुति सोनकर ने कहा कि “बालिका दिवस पर लड़कियों के सपनों और उनके लिए बराबरी का समाज बनाने की है। अभी हम चाहे जितनी अपनी पीठ ठोके लेकिन लड़कियों के लिए मोहल्ले से लेकर शहर में स्वस्थ्य और सुरक्षित व्यवस्था नहीं है। अभी घर से लेकर, स्कूल कालेज, मोहल्ले में लड़कों से बहुत बात करने की ज़रूरत है। कोई बाहर से नहीं आता है। ईमानदारी से स्थितियों का आकलन करने से समस्या का समाधान होता है। आँख बंद कर लेने से समस्या का हल नहीं होता है। बल्कि समस्या बढ़ती जाती है“। कार्यक्रम के आखिर में बृजेश मिश्रा ने कहा कि “बालिका दिवस मानना ही अपने आप में यह प्रमाणित करता है कि बालिकाओं के लिए अवसर में कमी है। उनके साथ हिंसा होती है। पढ़ने, काम करने से रोका जाता है। इसलिए आज हमको यह प्रतिज्ञा लेनी है। कि हम किसी भी तरह से उनके साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ खड़े होंगे। कार्यक्रम का संचालन कर रहे आफ़ाक़ उल्लाह ने कहा कि आज अपने परिवेश में मौजूद गैरबराबरी को समझना जरूरी है। इस प्रक्रिया में अपने और दोस्तों को भी जोड़ें। उनके साथ पढ़ाई लिखाई, गाँव मोहल्ले की समस्यों पर बात की जाये।
कार्यक्रम में मुख्य तौर से दीपक कुमार, मेराजुल इस्लाम, सौरब दुबे, शिवांशु मिश्रा, नीलाम कुमारी, जाग्रति सोनकर, इक़रा खलीला, शुभम पांडे, वत्सला मिश्रा, ज़हीन सलमानी, अमन राठौर, आदि शामिल हुए।

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