-पुनर्वास बढाता है जीवन-आश , सम्मान व सत्कार है वृद्ध मनोआहार

अयोध्या। 55 वर्ष और उससे अधिक आयु के 20 प्रतिशत से अधिक उम्र के लोगों में वृद्धावस्था मनोरोग के लक्षण दिखते है। इनमे आमतौर पर अवसाद, चिंता और संज्ञानात्मक गिरावट शामिल होती है।
अवसाद और चिंता के बाद दूसरा है मनोभ्रंश और संज्ञानात्मक गिरावट जो अल्जाइमर और उससे संबंधित मनोभ्रंश रूप मे प्रचलित हैं, जो अक्सर अवसाद के साथ होते हैं। अन्य समस्याओं में शराब/नशीली दवाओं का दुरुपयोग, सिज़ोफ्रेनिया और तीव्र-भ्रम या डेलीरियम शामिल हैं। इन मनोरोगों के
जोखिम कारकों में मधुमेह, हृदय रोग और गठिया जैसी दीर्घकालिक, स्थितियां भी होती है।
सामाजिक या पारिवारिक अलगाव से उपजा अकेलापन अवसाद के खतरे में उत्प्रेरक का कार्य करता है जिसे ओल्ड-एज साइक्याट्री में इम्पटी-नेक्स्ट सिन्ड्रोम या खाली-घोसला सिन्ड्रोम कहा जाता है। अन्य पहलुओं में जीवन में होने वाले बड़े परिवर्तन जैसे सेवानिवृत्ति, जीवनसाथी का निधन,किसी नयी जगह या वृद्धाश्रम में जाना, आत्म-हीनता की भावना आदि प्रमुख है। मेडिकल ट्रीटमेंट व मनो सामाजिक पुनर्वास के मनोरसायनिक व मनो सामजिक प्रभाव वृद्धजनों में हैप्पी हार्मोन ऑक्सीटोसिन व इन्डोर्फिन का संचार कर जीवेष्णा व उमंग का संचार करते है।
अयोध्या स्थित राजकीय वृद्धाश्रम में आयुष्मान फाउंडेशन द्वारा आयोजित ज़ीरियाट्रिक मेंटल-हेल्थ एन्ड रिहैबिलिटेशन कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में यह बातें जिला चिकित्सालय के मनो परामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन ने कही। सत्र का संचालन फाउंडेशन अध्यक्ष पवन पटेल व संयोजन आश्रम प्रबंधक तथा धन्यवाद ज्ञापन अरशद रिज़वी व रुचि पाण्डेय ने किया। उपस्थित बुजुर्गों की मनो समस्याओं के समाधान के साथ ही रक्तचाप व रक्त शर्करा की जांच डा मनीष राय द्वारा किया गया।