-नींद व हैप्पी-हार्मोन्स बढ़ाते है एग्जाम- परफॉर्मेंस
अयोध्या। परीक्षा के दौरान दबाव या स्ट्रेस महसूस होना एक हद तक सकारात्मक है जिसे यू-स्ट्रेस या अच्छा दबाव कहा जाता है, क्योंकि इससे एनर्जी व उत्साह उत्पन्न करने वाले हार्मोन नारएड्रेनलिन संचार होता है। परन्तु यह दबाव या स्ट्रेस ज्यादा होने पर स्ट्रेस हार्मोंन कोर्टिसोल व एड्रेनलिन ज्यादा बढ़ने से यह डिस्ट्रेस या हताशा में बदल कर मनोशारीरिक -स्वास्थ्य व परीक्षा-प्रदर्शन को दुष्प्रभावित कर सकता है। यही डिस्ट्रेस की मनोदशा एग्जाम-फोबिया,एग्जाम- एंजायटी या एग्जाम-प्रेशर आदि नामों से भी जाना जाता है।
घबराहट, बेचैनी, हताशा, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन बढ़ना, बुरे ख्याल आना , मुंह सूखना, सांस का तेज़ चलना, सिर दर्द,पेट दर्द,उल्टी,मिचली,लिखने वाले हाथ सुन्न होना,बेहोशी,आवाज़ बैठना, नींद मे चौंककर उठना,अनिद्रा,अतिनिद्रा, कंटेंट कठिन प्रतीत होना या याद न होना, याद कंटेंट भी भूलने लगना, जैसे लक्षण इसमें दिखायी पड़ सकतें हैं।इसकी सम्भावना उनमे ज्यादा होती है जिनका इंटेलीजेंस-क्वोशेन्ट या बौद्धिक लब्धता -आईक्यू तो अच्छी होती है पर भावनामक लब्धता या इमोशनल-क्वोशेन्ट- ईक्यू कम होता हैं। दूसरे शब्दों मे ऐसे छात्र कुशाग्र पर चिंतालु व्यक्तित्व के होते हैं।
बचावः
चिंता वाली मनोदशा के प्रति सतर्क रहें। परफॉर्मेंस बेहतर उन्ही का होता है जो इमोशनली इंटेलीजेंट होते हैं।अध्ययन के बीच छोटे ब्रेक लेकर मनोरंजक गतिविधियों का आनन्द लें तथा तरल पदार्थो का सेवन करते रहें ,क्योंकि ब्रेन का अस्सी फीसदी हिस्सा तरल होता है। छः से आठ घन्टे की गहरी नींद अवश्य लें क्योंकि नींद से ही ब्रेन-बैटरी चार्ज होती है।
नकारात्मक व तुलनात्मक स्वआंकलन व छूटी विषय वस्तु की चिंता न करते हुए एवं एैसा करने वाले तथा अतिअपेक्षित वातावरण बनाने वाले मित्रों व परिजनों के दबाव से बचें। पेपर देने जाने की मनोदशा को खुशमिजाजी व पर्व जैसे उत्साह की बनाये रखें । इससे स्ट्रेस हार्मोन्स में कमी आती है तथा हैप्पी हॉर्मोन्स सेरोटोनिन, डोपामिन, इन्डॉर्फिन व ऑक्सीटोसिन की वृद्धि ब्रेन-बूस्टर का कार्य करती है। समस्या बनी रहने पर मनोपरामर्श अवश्य लें। बोर्ड परीक्षा सन्दर्भित मनोजागरूकता वार्ता में जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन ने यह जानकारी दी।