-महर्षि महेश योगी रामायण विवि में आयोजित उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के 47 वें प्रांतीय सम्मेलन का समारोहपूर्वक आगाज

अयोध्या। विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास जिससे होता है, वही शिक्षा है। ऐसे में शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो आत्मज्ञान कराए। योग, ध्यान, चेतना और अच्छी शिक्षा से आत्मज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। यह बात महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने कही। वह महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय में आयोजित उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के 47 वें प्रांतीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि चेतना की सात अवस्थाएं होती हैं। जिसमें जागना, सपने देखना और सोना सभी के जीवन का अहम हिस्सा होता है। लेकिन उसके बाद के लिए ध्यान, धारणा और चेतना को आत्मसात करना पड़ता है। जिसमें योग सर्वश्रेष्ठ है। भावातीत ध्यान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता, अनुशासनशीलता, रचनात्मक सहित सर्वांगीण विकास होता है। उन्होंने सभी प्रधानाचार्य से बच्चों को ध्यान और योग का अभ्यास कराने के लिए भी प्रेरित किया।कुलाधिपति ने कहा कि महर्षि ने वर्ष 1953- 56 में गुरु स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती के निर्देश पर ज्ञान का विस्तार करना शुरू किया था। गुरु ने निर्देशित किया था कि भारत के ज्ञान को पूरे विश्व में विस्तारित किया जाए।
उन्होंने कहा था कि योग में स्थित होकर कार्य करने से अप्रत्याशित सफलता मिलती है। उसी के बाद विश्वविद्यालय की अवधारणा तय हुई। अध्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार सिंह ने कहा कि ज्ञान, दान का कर्म सभी में श्रेष्ठ होता है और इस उत्तरदायित्व का प्रधानाचार्य पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन कर रहे हैं। जब ज्ञान श्रेष्ठ होता है तब वैचारिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का सहज ही संवर्धन होता है। उन्होंने कहा कि प्रांतीय सम्मेलन प्रधानाचार्य के हितों की रक्षा के लिए मिल का पत्थर साबित होगा। शैक्षिक गुणवत्ता में उत्तरोत्तर वृद्धि, पाठ्यक्रम सहित विद्यालयों के संरचना और संवर्धन में प्रधानाचार्य का अहम योगदान होता है।
प्रांतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.भानु प्रताप सिंह ने कहा कि देश में श्रेष्ठ और सार्थक वातावरण बनाए रखने में शिक्षा का योगदान सर्वाधिक होता है। जिसके लिए महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय कर्तव्यनिष्ठा के साथ दिनरात लगा है। प्रांतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को प्रधानाचार्य परिषद के संरक्षक श्रीनिवास शुक्ला, राजेंद्र कुमार बाजपेई और तेज प्रताप सिंह सहित जिला विद्यालय निरीक्षक अयोध्या डॉ. पवन कुमार तिवारी ने भी संबोधित किया। स्वागत संबोधन परिषद के प्रांतीय कोषाध्यक्ष और आयोजन संयोजक डॉ.मणि शंकर तिवारी ने व्यक्त किया।
उन्होंने प्रधानाचार्य परिषद के आयोजित सम्मेलन के उद्देश्य, आवश्यकता और सार्थकता पर प्रकाश डाला। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र समारोह का संचालन प्रांतीय महामंत्री रविंद्र त्रिपाठी और धन्यवाद ज्ञापन जिला मंत्री राम प्रिया शरण सिंह ने किया। समारोह के आरंभ में एसएसवी इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने संगीत अध्यापक अनिल मिश्रा के निर्देशन में स्वस्तिवाचन, सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कुलाधिपति सहित अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित किया।
आयोजकों ने अतिथियों का माल्यार्पण और बुके भेंट कर स्वागत और स्मृतिचिन्ह और अंगवस्त्र भेंटकर अभिनंदन किया। इस दौरान मंडलीय और जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी केके यादव, डॉ. राम सुरेश मिश्रा, जितेंद्र कुमार राव, अनिल वशिष्ठ, प्रतिभा पाण्डेय, सुनील कुमार शर्मा, सरला चौधरी, डॉ.उदय भान सिंह, तुलसीराम पटेल, हरिप्रसाद यादव, अशोक कुमार तिवारी, डॉ. रमेश मिश्रा, शिव कुमार मिश्रा, प्रदीप कुमार वर्मा, श्रीनाथ शुक्ला सहित प्रदेश के जनपदों से डेढ़ सौ से अधिक प्रधानाचार्य मौजूद रहे।
11 प्रधानाचार्य को कुलाधिपति ने किया सम्मानित
अयोध्या। महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय में प्रधानाचार्य के आयोजित 47 वें प्रांतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र समारोह में कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने प्रधानाचार्य परिषद में सर्वश्रेष्ठ कार्यों के लिए 11 पदाधिकारियों को सम्मानित किया। उन्होंने प्रांतीय अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह, संरक्षक श्रीनिवास शुक्ला, तेज प्रताप सिंह, राजेंद्र कुमार बाजपेई, डॉ. वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी, डॉ. रविंद्र त्रिपाठी, डॉ.मणि शंकर तिवारी, राम प्रिया शरण सिंह, डॉ.राम सुरेश मिश्रा, डॉ. उदयभान सिंह और डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने यूनियन बैंक के परिचालन प्रबंधक जटा शंकर मिश्र और अयोध्या शाखा के प्रबंधक विनोद कुमार दुबे को भी सम्मानित किया। प्रदेश के सभी प्रधानाचार्यों को भी कुलाधिपति की ओर से स्मृतिचिन्ह प्रदान किए गए।