इंजेक्शन से ओवरडोज के मामले में निर्मला अस्पताल के डॉ. आरके बनौधा ने दी सफाई

by Next Khabar Team
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-बोले ओवरडोज से नहीं हुई मौत, लखनऊ के निजी अस्पताल का दिखाया डेथ सर्टिफिकेट

अयोध्या। ओवरडोज इंजेक्शन से हलकारा का पुरवा निवासी सरोज 50 की मौत के मामले में रविवार को निर्मला हास्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर के संचालक डॉ. आरके बनौधा आईएमए अध्यक्ष डॉ. आशीष श्रीवास्तव के साथ मीडिया के सामने आए। इस दौरान डॉ. बनौधा की पत्नी डॉ. रंजू बनौधा भी मौजूद रहीं। डा. आरके बनौधा ने कहा कि हमारे हास्पिटल में डायलिसिस व आईसीयू की व्यवस्था है जिससे मरीजों की पहली प्राथमिकता हमारे यहां इलाज कराने की होती रही है। इसी बात से अस्पताल की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से कुछ लोगों के उकसाने पर हमारे उपरोक्त हास्पिटल को झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने की कोशिश की गयी है।

जिस महिला के मृत्योपरांत हमारे हास्पिटल में कुछ लोगों द्वारा तोड़फोड़ कर जहां अस्पताल की आर्थिक क्षति पहुंचायी गयी वहीं हमारे स्टाफ को भी मारापीटा गया। इस बारे में बताना है कि जिस मृत महिला को ओवरडोज इंजेक्शन लगाने का आरोप है वह सरासर झूठ है यदि कोई भी इंजेक्शन किसी मरीज को लगाया जाता है तो कुछ समय में ही उसका रिएक्शन स्पष्ट हो जाता है। हमारे अस्पताल में महिला को सुबह आठ बजे इंजेक्शन लगाया गया जबकि उसे सायं चार बजे अस्पताल से रिफर किया गया। सुबह आठ से सायं चार बजे तक मरीज को कोई भी समस्या नहीं थी। मरीज की मृत्यु लखनऊ स्थित किसी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। भर्ती मरीज को ले जाते समय जबरन 20-25 लोगों द्वारा मेरे स्टाफ से दवा के ओवरडोज की बात लिखवायी एवं कहलवाई गयी जबकि यह सरासर असत्य है।

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दिनांक 16 दिसंबर को रात तीन बजे मृत महिला के स्वजनों द्वारा अस्पताल के सामने शव को रखकर हंगामा किया गया अस्पताल में घुसकर तोड़फोड़ की गयी स्टाफ को मारापीटा गया। इस दौरान अस्पताल के निदेशक को जान से मारने की धमकी दी गयी जो सारी बातें अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे में कैद है। हंगामा के दौरान हमने 112 नंबर व स्थानीय पुलिस को फोन से सूचित किया जिस पर पुलिस द्वारा भी घटनास्थल पर पहुंचकर वीडियोग्राफी की गयी। यह सारा झूठा असत्य बेबुनियाद आरोप केवल अस्पताल को बदनाम करने की साजिश मात्र है।

हमारे हास्पिटल की अच्छी कार्यप्रणाली, समुचित व सस्ते इलाज से बहुत से गंभीर मरीजों को लाभ हुआ है। ऐसे मरीज जो लखनऊ नहीं जा सकते हमारे यहां डायलिसिस कराने व आईसीयू में भर्ती होने आते हैं। यदि इस प्रकार झूठा आरोप लगाकर डाक्टर व अस्पताल को बदनाम किया जायेगा तो कोई भी प्राइवेट अस्पताल गंभीर रोगियों को लेने से इनकार करेगा जिसका असर गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों के ऊपर पड़ सकता है। प्रेस वार्ता में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉ प्रवीण मौर्या, डॉ नानक सरन, डॉ अफरोज खान, डॉ शईदा रिजवी, डॉ शिवेंद्र सिन्हा, डॉ रजनीश वर्मा, आदि लोग ने अपने विचार रखे।

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