बीटीसी व शिक्षामित्रों को नहीं सुहा रहा बीएड धारकों को शिक्षक बनने का मौका देना

शिक्षक पात्रता परीक्षा और शिक्षक भर्तियों में दावेदारों की संख्या बढ़ना तय

रुदौली-फैजाबाद। प्राथमिक स्कूलों में बीएड धारकों को शिक्षक बनने का मौका देना बी.टी.सी और शिक्षामित्रों को नही सुहा रहा है।दोनों संगठनों ने बीएड धारकों के खिलाफ तीखी प्रक्रिया दी है। राष्टीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी एनसीटीइ के आदेश को शिक्षामित्र शीर्ष कोर्ट की अवमानना बता रहे है ।बीटीसी संयुक्त प्रशिक्षु मोर्चा ने इस आदेश को हाइकोर्ट में जल्द चुनौती देने का एलान किया है।
एनसीटीई ने पिछले महीने 2010 केआदेश में संशोधन करके बीएड धारकों को भी प्राथमिक शिक्षक बनने का मौका मुहैया कराया है।इस आदेश से अगली टीईटी यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा और शिक्षक भर्तियों में दावेदारों की संख्या बढ़ना तय है,ऐसे में प्रतिस्पर्धा डिप्लोमा धारक इस आदेश के खिलाफ लामबंद होना शुरू हो गए है,बीटीसी प्रशिक्षु अर्पित मिश्रा ने बताया कि प्राथमिक विद्यालयों में बीएड धारकों को पहले ही अमान्य किया जा चूका है,ऐसे में उन्हें फिर मौका दिया जाना ठीक नही है,इस आदेश को लेकर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री का घेराव करेंगे और हाइकोर्ट में जल्द हि आदेश के खिलाफ अपील तैयार की जायेगी,प्रशिक्षु अनूप मिश्रा ने कहा है कि जब सुप्रीम कोर्ट बीएड धारकों को प्राथमिक शिक्षक बनने से रोक लगा चुका है,अब एनसीटीई ने उन्हें अनुमति देकर शीर्ष कोर्ट के आदेश की अवमानना की है,सुप्रीम कोर्ट को इस पर विचार करना होगा की एनसीटीई का आदेश सही है कि नही। बीटीसी प्रशिक्षु दीपक निषाद ने कहा बीएड डिग्री धारकों को तो जूनियर से लेकर इंटर तक विद्यालयों में अध्यापन हेतु रोजगार दिया जा सकता है,किंतु बीटीसी का एकमात्र विकल्प प्राइमरी विद्यालय ही है। उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष दुर्गेश मिश्र ने कहा कि जिस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से ऊपर उठकर सरकार ने बीएड डिग्रीधारकों के लिए अध्यादेश पारित किया है,उसी तरह पौने 2 लाख शिक्षामित्रों के लिए भी अध्यादेश पारित करना चाहिये। लगभग 5 लाख बीटीसी एवं शिक्षामित्र का कहना है हमः सभी वोट बैंक बनाने के चक्कर में राजनीति का शिकार हुए।सरकार के इस फैसले से जहा बीटीसी शिक्षामित्रों में रोष व्याप्त है वही बीएड अभ्यर्थियों में खुशी का माहौल व्याप्त है। बीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मांग लंबे समय से की जा रही थी,अब वह पूरी हो गयी।

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