शोध : अपोजिशनल डिफाएंट डिसऑर्डर ( ओ डी डी )से किशोर किशोरी हो रहे हिंसक

  • इम्पल्स कंट्रोल डिसआर्डर का ही गम्भीर रूप है ओ डी डी
  •  किशोरो व किशोरियों में समान रूप से बढ़ रहा है  अपोजिशनल डिफाएंटडिसऑर्डर ( ओ डी डी)
डॉ आलोक मनदर्शन

सही डांट फटकार के हिंसक प्रतिशोध की मनोवृत्ति ही है ओ डी डी

इन दिनों तेजी से बढ़ती किशोर हिंसा व जघन्य अपराध की घटनाएं खबरों का हिस्सा बनती जा रहीं है। जिला चिकित्सालय के किशोर मित्र क्लिनिक व मनदर्शन मिशन द्वारा किया गया एक शोध निष्कर्ष सामने आया है। जिसके मुताबिक किशोर व किशोरियों द्वारा होने वाली शारीरिक और मानसिक हिंसा के पीछे इम्पल्स कंट्रोल डिसआर्डर नामक मानसिक विकार उभर कर सामने आया है।
शोध के अनुसार इन दिनों किशोर मानसिक अगवापन की मनोदशा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है।गुरुग्राम, दिल्ली व लखनऊ के हाईप्रोफाइल स्कूल की जघन्य किशोर अपराध ने किशोर मनोविशेषज्ञों की ऐसी किशोर मनोदशा पर सामयिक शोध करने पर विवश कर दिया। इस किशोर जघन्य अपराध विशेष शोध के निष्कर्ष अब जनहित में जारी कर दिये गये है ।
किशोर हिंसा , जघन्य अपराध या किशोर अपचार या अन्य उपनामों से जाना जाने वाला यह शब्द एक गम्भीर मनोसामाजिक मुद्दा बनकर उभर चुका है। मनदर्शन मिशन व किशोर मनोस्वास्थ्य क्लीनिक के संयुक्त तत्वाधान में तीन महीने तक किए गए निदानात्मक शोध में अपराधिक मनोवृत्ति और इम्पल्स कंट्रोल डिसआर्डर के बीच प्रबल धनात्मक सहसंबंध पाया गया है। ऐसे किशोर व युवाओं ने अपनी इम्पल्स या रूग्ण-मनोवेग को नियंत्रित कर पाने की क्षमता में भारी कमी की स्वीकारोक्ति के साथ ही दोस्तों की मौजूदगी में मनोवेग के ताकतवर होने को भी स्वीकार किया। इस प्रकार दोस्तों की संगति आक्रामक  व्यवहार के उत्प्रेरक के रूप में प्रभावी दिखी।
जिला चिकित्सालय के किशोर मनोपरामर्शदाता डॉ आलोक मनदर्शन के अनुसार किशोरों का यह हिंसक व्यवहार धीरे-धीरे एक मादक खिचाव का रूप ले लेता है। जिसका एक्टिव रूप जघन्य अपराध के रूप में तथा पैसिव रूप सोशल मीडिया की अभद्र व अश्लील चैटिंग के रूप में दिखाई पड़ती है।
  • दुष्प्रभाव:- इम्पल्स कंट्रोल डिसऑर्डर व्यवहार के किशोर व युवा आगे चलकर कम्पल्सिव-इम्पलसिव डिसआर्डर के शिकार हो जाते है, नतीजन उनमें एकांकीपन, आत्मविश्वास में कमी, आक्रोशित व्यवहार व अवसाद या उनमाद जैसी रूग्ण मनोदशा इस प्रकार हावी हो जाती है कि पढ़ाई व अन्य सकारात्मक कार्यों से उबन, अनिद्रा व अल्पनिद्रा, सर दर्द व चिड़चिड़ापन, जेन्डर आधारित हिंसा व दुर्घटना, मनोसेक्स विकृति व नशाखोरी की सम्भावना प्रबल हो जाती है। यह मनोविकृति यहीं न रुककर और गंभीर रूप ले लेता है जिसे अपोजिशनल डिफायन्ट  डिसऑर्डर (ओ डी डी ) कहा जाता है इसमें किशोर या किशोरी अपने से बड़ो की द्वारा गलत बात के लिए डांट फटकार पाने पर या छोटो द्वारा भी छद्म अपमानित महसूस कर जाते है और हिंसक प्रतिरोध के किसी भी स्तर तक जाने से गुरेज नही करते ।ये अपचारी व्यवहार न केवल किशोर बल्कि किशोरियों में भी काफी हद तक हावी हो चुका है ।
  • बचाव व उपचार: ऐसे किशोर व किशोरियोंं की अन्तर्दृष्टि जागरूकता के माध्यम से उनमें रूग्ण- मनोवेग की पहचान करने तथा कम्पलसिव व्यवहार को रोकने की चेतना विकसित की जाती है। बुरी संगति से दूर रहने तथा सोशल मीडिया पर अपने इम्पलसिव व्यवहार पर संयम रखने का अभ्यास सकारात्मक परिणाम देता है। अभिभावक, शिक्षक व अन्य प्रियजन सोशल मीडिया व इंटरनेट की अति लिप्तता को रिवॉर्ड बेस्ड टैपेरिंग टेक्नीक मनोविशेषज्ञ से सीख कर सजग रोल माडलिंग करते हुए मैत्रीपूर्ण व सजग व्यवहार रखें तथा किशोर व्यवहार मोडिफिकेशन करते हुए  रचनात्मक, मनोरंजक व स्पोर्टिंग गतिविधियों को प्रोत्साहित करें तथा ज्यादा अकादमिक प्रेशर न थोपें। जरूरत पड़ने पर मनोपरामर्श की कागनिटिव थिरैपी बहुत ही कारगर है। शोध टीम के अन्य सदस्यों में बालकिशन निषाद, अरशद रिजबी, अनित दास, व नमिता मनदर्शन प्रमुख रहे।
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