टीनेज पैरानोइआ बन सकता है, स्कीजोफ्रिनिया मनोरोग: डा. आलोक

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विश्व स्कीजोफ्रिनिया दिवस पर हुई कार्यशाला

फैजाबाद। इष्र्यालु व्यक्ति व झगड़ालु व्यवहार यदि किशोर/किशोरियों में लगातार दिखें तो ऐसे में सतर्क हो जाने की जरूरत है। जिला चिकित्सालय के किशोर मनोपरामर्श दाता डाॅ. आलोक मनदर्शन के अनुसार यदि यह व्यवहार लम्बे समय तक बना रहे तो हो सकता है कि वह टीनेज पैरानोइआ की गिरफ्त में आ रहा है। इस मनोदशा में उसके मन में न केवल करीबी दोस्तों बल्कि अपने परिवारीजनों के प्रति भी ईष्र्या या नफरत की भावना घर कर जाती है और शक व वहम इस तरह हावी हो जाता है कि कोई भी तर्क या व्यवहारिक वास्तविकता उन्हें संतुष्ठ नहीं कर पाती है। इसे साइकियाट्री की भाषा में डिल्यूजन कहते हैं। इस प्रकार भ्रमित व विभ्रमित मनोदशा को सही मानते हुए इनका व्यवहार इष्र्यालु व हिंसक होता चला जाता है और उसमें काल्पनिक असुरक्षा व भय की भावना से उसका व्यवहार घर या समाज में असामान्य या झक्कीपन के रूप में दिखाई पड़ने लगता है।

दुष्परिणाम-एकाग्रता में कमी, पढ़ाई में मन न लगना, चिड़चिड़ापन, क्रोध, हिंसात्मक व्यवहार, ऊल-जुलूल हरकतें, गाली-गलौंच, मारपीट, बदले की भावना, दूसरों की बुराई आदि। प्रेम सम्बन्धों में ऐसे युवक व युवतियां काल्पनिक शक की वजह से किसी भी गम्भीर प्रतिक्रिया पर भी उतारू हो सकते हैं, जिसकी परिणति अपराधिक कृत्यों में हो सकती है। ये लक्षण आगे चलकर स्कीजोफ्रिनिया नामक गम्भरी मनोरोग का रूप ले सकते हैं। टीनेज पैरानोइआ से ग्रसित टीनेजर की अन्तर्दृष्टि शून्य के समान तो हो ही जाती है तथा वह अपनी नकारात्मक आभाषी दुनिया में ही जीने लगता है। साथ ही अभिभावक व उसके परिजन भी उसके असामान्य व्यवहार को नासमझी में लेते हुए मारपीट या अन्य तरीकों से ठीक करने का प्रयास करते हैं या फिर यह मान लेते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ सब ठीक हो जाएगा, जबकि होता इसका उल्टा है।

सुझाव व सलाह-डाॅ. मनदर्शन के अनुसार ऐसे टीनेजर के शुरूआती लक्षणों को पहचानकर समुचित मनोउपचार कराना चाहिए तथा उसमें आत्मविश्वास व दूसरों पर विश्वास करने को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिससे कि उसमें स्वस्थ अन्तर्दृष्टि एवं कल्पनालोक से इतर व्यवहारिक जीवन जीने की मनोदशा का विकास हो सके। असामान्य व्यवहार की प्रतिक्रिया सकारात्मक ढंग से करना चाहिए, न कि मारपीट द्वारा। सामाजिक व्यवहार व मनोरंजक क्रियाकलापों को बढ़ावा देना चाहिए। काॅगनिटिव बिहेवियर थिरैपी इस डिसार्डर में बहुत ही कारगर है।