एड्स रोगियों की बढ़ती संख्या चुनौती: प्रो. मनोज दीक्षित

“करेंट ट्रेंड इन एचआईवी रिसर्चः चैलेंजेज एण्ड सल्यूशन” विषय पर एक दिवसीय अरोमा का हुआ आयोजन

फैजाबाद। डाॅ0 राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में जीन क्लब एवं बायोकमेस्ट्री विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “करेंट ट्रेंड इन एचआईवी रिसर्चः चैलेंजेज एण्ड सल्यूशन” विषय पर एक दिवसीय अरोमा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित एवं मुख्य वक्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद बायोकमेस्ट्री विभाग के प्रो0 बी0 शर्मा रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि विश्वस्तर पर दिनोंदिन बढ़ रही एड्स रोगियांे की समस्या निश्चय ही बड़ी चुनौती के रूप में है। विश्वस्तर के आंकड़ों को देखा जाए तो अमेरिका सबसे कम प्रभावित देश है। सामाजिक जागरूकता एवं उच्च शिक्षा का स्तर इस रोग पर प्रभावी नियन्त्रण लगा सकता है। आचार्य दीक्षित ने कहा कि भारत के संदर्भ में जहां शिक्षा और स्वास्थ्य पर काफी कुछ किया जाना बाकी है। सामाजिक जागरूकता को निचले स्तर पर लागू करना होगा इसमें सरकार और गैर सरकारी संगठनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने बताया कि यह एक ऐसी सामाजिक चुनौती है जिसकी शुरूआत 1981 के दौर से मानी जाती है। तब से लेकर अबतक इस पर काफी कुछ बचाव के कार्य किये गये परन्तु पूरी तरह से नियन्त्रण नही हो पाया।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में मुख्य वक्ता प्रो0 बी0 शर्मा ने प्रथम सत्र में पी0पी0टी0 के माध्यम एड्स वायरस के फैलाव से लेकर शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को चित्रित करते हुए उसके विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला। प्रो0 शर्मा ने बताया कि एड्स वायरस का सर्वप्रथम रोगी सन् 1981 में पाया गया। जो एचआईवी टाइप-1 से ग्रसित था। भारत में सर्वप्रथम 1986 में मणिपुर राज्य में रिपोर्ट हुआ था। धीेरे-धीरे यह संक्रमण देशभर में बड़े पैमाने पर प्रकाश में आये। 2001 से लेकर 2014 तक की रिपोर्ट में यह पाया गया कि भारत में यह ग्राफ स्थिर अवस्था में आ गया। यह संतोष का विषय है कि धीरे-धीरे यह ग्राफ का स्तर नीचे जा रहा है। सरकार द्वारा एड्स नियत्रंण सोसाइटी का गठन इसके नियत्रंण पर प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। इस क्षेत्र में गैर सरकारी संगठनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। परन्तु अभी इस पर नियत्रंण के और प्रभावशाली कदम उठाने होगें।
तकनीकी सत्र में छात्र-छात्राओं द्वारा विषय से संबंधित प्रश्न पूछे गये और एड्स नियत्रंण पर हुए नये शोध पर क्रमवार चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन विभाग के सार्थक श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर कार्यपरिषद के सदस्य ओम प्रकाश सिंह, अधिष्ठाता छात्र-कल्याण प्रो0 आशुतोष सिन्हा, प्रो0 एस0के गर्ग, प्रो0 हिमांशु शेखर सिंह, डाॅ0 विनोद श्रीवास्तव, डाॅ0 सिद्धार्थ शुक्ला, डाॅ0 शैलेन्द्र कुमार, डाॅ0 विनय मिश्रा, डाॅ0 मणिकांत त्रिपाठी, आदि उपस्थित रहे।

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