स्क्रिजोफ्रिनिया पीड़ित करता है कल्पना लोक में विचारण: डा. शिशिर वर्मा

फैजाबाद। विश्व स्क्रिजोफ्रिनिया दिवस की पूर्व संध्या पर प्रसिद्ध न्यूरोसाइक्रियाटिक डा. शिशिर वर्मा ने पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि इस रोग से पीड़ित कल्पना लोक में विचरण करने लगते हैं। रोगी की सोच भावना और व्यवहार में बदलाव आ जाता है मरीज वास्तविकता और कल्पनाओं के बींच अन्तर करने की क्षमता खो देता है। देश में एक करोड़ से अधिक पुरूष व महिलाएं इस रोग से पीड़ित हैं फैजाबाद में हर सप्ताह जिला चिकित्सालय में 15 नये मरीज आते हैं।
उन्होंने बताया कि यह मानसिक रोग है जिसका मुख्य कारण तनाव है। ऐसे रोगी के मन में दूसरों के प्रति शंका उत्पन्न हो जाती है उसे लगता है कि उसपर जादू टोना कर दिया गया है लोग उसे और उसके परिवार को मार डालेंगे, जहर दे देंगे, पुलिस या सीबीआई उसे पकड़ लेगी और लोग उसके खिलाफ षड़यंत्र रच रहे हैं। रोगी के कानों में अनचाही आवाजें आती है जो उसे बुलाती है या धमकाती हैं। रोगी अकेले में हंसता है रोता है या बुदबुदाता है उसकी दिनचर्या भी अनियमित हो जाती है यही नहीं नींद और भूंख कम हो जाती है तथा व नशे की तरफ आकर्षित होने लगता है कभी-कभी मरीज उग्र हो जाता है और मारपीट करने लगता है।
उन्होंने बताया कि इस मानसिक रोग के सम्बन्ध में समाज में अनेक भ्रांतिया व्याप्त हैं अक्सर लोग सोचते हैं कि यह रोग भूत-प्रेत, बुरी नजर, या जादू टोना से हुआ है। इसी कारण लोग मरीज को लेकर तांत्रिक या ओझा के पास जाते हैं जबकि असलियत यह है कि यह रोग मस्तिष्क मेंि व्याप्त न्यूरोके मिकल्स की कमी से होता है। कभी-कभी लोग इसका कारण वासना की गर्मी को मानते हैं और मरीज की शादी कर देते हैं शादी कर देने के बाद समस्यायें ठीक होने की जगह बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि इस रोग के इलाज के लिए बहुत सी दवाईयां उपलब्ध हैं जिनके नियमित सेवन से रोगी सामान्य जीवन जी सकता है दवाईयों के सेवन से मरीज को कोई लत नहीं लगती है और एक निश्चित समय के बाद दवाईयां बन्द हो जाती है।

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