रिजल्ट रिएक्टिव कॉन्फ्लिक्ट से सजग रहें  परीक्षार्थी : डॉ आलोक मनदर्शन

आवेशित अर्धचेतन मन ही ले जाता है रिजल्ट रिएक्टिव कॉन्फ्लिक्ट में

फैजाबाद। बोर्ड एग्जाम रिजल्ट की तिथि नज़दीक आने के साथ ही परीक्षार्थी का मन अनुकूल या प्रतिकूल परिणाम आने की द्वंद भारी मनोदशा से इस प्रकार आसक्त हो जाता है कि मन मे रस्सा कसी होने लगती है। जिससे उनमे अनिद्रा, बेचैनी, भूख में कमी, चिड़चिड़ापन , सरदर्द , उदासी, क्रोध, मिचली, उल्टी, पेटदर्द  बेहोसी, मूर्छा जैसे लाक्षणिक व्यवहार नज़र आ सकते है । साथ  ही कुछ लोग गुमशुम व तन्हाई पसंद होने लगते है। इतना ही नही कुछ लोग अपेक्षित परिणाम न आ पाने की पूर्व आशंका में रिजल्ट आने तक इंतज़ार धैर्य पूर्वक न करके किसी आत्मघाती या पलायन वादी कृत्य पर उतारू हो सकते है। कुछ लोग परीक्षा परिणाम उपरान्त ऐसे कदम उठाने की सोच बनाकर ऐसे कृत्य भी कर सकते है। इस मनोदशा को मनोविश्लेषण की भाषा मे रिजल्ट रिएक्टिव कॉन्फ्लिक्ट कहा जाता है ।

डा० आलोक मनदर्शन

मनोगतिकीय कारक :

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जिला चिकित्सालय के किशोर मनोपरामर्शदाता डॉ आलोक मनदर्शन के अनुसार रिजल्ट  रिएक्टिव कॉन्फ्लिक्ट से ग्रसित परीक्षार्थी का अर्धचेतन मन अति आवेशित हो जाता है जिसके परिणाम स्वरूप उसके मन मे नकारात्मक व अनचाहे विचार व मनोभाव बार बार आते रहते हैं और अपेक्षित परिणाम न आने तथा आलोचना से न बच पाने के मनोद्वन्द में  वह इस प्रकार झूलता रहता है जैसे घड़ी का पेंडुलम। उसे एक तरफ कुआं तथा दूसरी तरफ खाई जैसी मनोस्थिति नज़र आने लगती है।

बचाव:

ऎसे में परिजन व अभिभावक का रोल बहुत अहम होता है कि वे अति अपेक्षा पूर्ण वातावरण व तुलनात्मक आंकलन कदापि न करे तथा अपने पाल्य की गतिविधियों पर मित्रपूर्ण व सजग पैनी नज़र रखे तथा कुछ भी असामान्य व्यवहार दिखने पर तुरंत किशोर मनो परामर्श अवश्य ले। परीक्षार्थी अपने मन को द्वंद की दशा से न तो आसक्त होने दें
औऱ न ही प्री रिजल्ट व पोस्ट रिजल्ट  किसी भी प्रकार के आत्मग्लानि या अवसादग्रस्त मनोगतिकीय दशा को अपने मन पर हावी होने दें।  आठ घन्टे की नींद अवश्य लें और अपनी योग्यता पर भरोसा रखते हुए सकारात्मक मन से परीक्षा  परिणाम को स्वीकार करें औऱ भविष्य की सकारात्मक आधार शिला बनायें।
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