रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला की पूजा अर्चना में भी घोटाला

 

 मुख्य अर्चक आचार्य सतेन्द्र दास का आरोप दान पात्र से करोड़ो के आभूषण गायब

अयोध्या-फैजाबाद। रामजन्मभूमि अयोध्या में विराजित  रामलला की पूजा अर्चना में भी करोड़ो रुपए के भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यह आरोप रामजन्मभूमि के ही मुख्य पुजारी आचार्य सतेन्द्र दास ने ही कोर्ट द्वारा निर्धारित रिसीवर व उनके एक कर्मचारी बसंत लाल मौर्या पर लगाया है। उनका कहना है कि रामलला के पूजा-पाठ और परिसर में चढ़ने वाले दान को सार्वजनिक किए बगैर गुप्त रूप से बिना लिखा-पढ़ी के गायब कर दिया गया है। उन्होंने पूर्व में श्री राम जन्मोत्सव के दौरान खर्च हुए धनराशि का पूरा ब्यौरा न देने का आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत पत्र भी दिया है।

अयोध्या में स्थित विवादित स्थल राम जन्म भूमि पर 1992 में हुई घटना के बाद कोर्ट द्वारा इस भूमि पर रिसीवर को नियुक्त कर दिया गया था। उसके बाद से इस परिसर में हो रहे पूजा पाठ से लेकर सभी खर्चे रिसीवर की देख रेख में थे। राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सतेन्द्र दास ने रामलला के पूजा पाठ में खर्च हो रहे धनराशि मानक से कम देने की शिकायत करते हुए परिसर के अंदर दान में चढ़ रहे धनराशि के साथ करोड़ों के सोना चांदी के सामानों को गायब करने का आरोप लगाया है। वो बताते हैं कि रामलाल में पूजा पाठ सही रुप से नहीं हो पा रही है। रिसीवर को संपत्ति के रख रखाव व पूजा अर्चना के लिए सभी व्यय देने के लिए कोर्ट ने आदेश दिया थे। राम जन्म भूमि के रिसीवर फैजाबाद के मंडलायुक्त व उनके द्वारा देखभाल के लिए नियुक्त क्लर्क बसन्त लाल मौर्या के नेत्रत्व में काम करते हैं।

इसे भी पढ़े  पल-पल निखरे रूप का रामकथा संग्रहालय में हुआ विमोचन

राम जन्मभूमि में कोर्ट के आदेशानुसार रामजन्मभूमि के आय और व्यय को सार्वजनिक किया जाता था जो कि अब नहीं किया जाता है। परिसर के दानपात्र में धन राशि के साथ अन्य वस्तुएं जैसे सोना चांदी के सामान भी चढ़ते थे, जिसका पूरा लेखाजोखा एक रजिस्टर में होता था, लेकिन वो सारी प्रक्रिया अब बंद कर दी गई हैं। इसी के चलते अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र के माध्यम से शिकायत भेजना पड़ा है कि रामलला के दानपात्र में आए पैसे रामलाल के लिए ही खर्च हों, लेकिन यह धनराशि पूर्ण रूप से रामलला उत्सव में नहीं खर्च किए जा रहे हैं। मंडलायुक्त के बदलने के साथ रिसीवर बदल जाते रहते हैं। वर्तमान में आने वाले रिसीवर को कोर्ट के आदेशों का ना तो पता हैं और ना ही उन्हें पूर्ण रूप से जानकारी दी जाती है। रामजन्मभूमि में रामलला के पास जितने भी सोना व चांदी के सामान चढ़ाए गए हैं वह सभी गायब हैं। इसकी पूरी जिम्मेदारी रिसीवर की क्लर्क बसंतलाल मौर्या की है क्योंकि इसके बारे में पूरी जानकारी सिर्फ इन्हीं को है। मजिस्ट्रेट तो सिर्फ हस्ताक्षर कर चले जाते हैं। यहां कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन और भ्रष्टाचार हो रहा है। यह सभी एक क्लर्क के माध्यम से हो रहा है। उन्होंने कहा हम सरकार से यह मांग करेंगे कि वे इसकी जांच करें कि आखिर कोर्ट के आदेश के बाद भी संपत्ति का लेखा-जोखा क्यों बंद कर दिया गया और इनकी संपत्ति कहां रखी गई है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More