वन की हिफाजत करना सबकी जिम्मेदारी: रवि कुमार सिंह

 

कुमारगंज वन चेतना केंद्र मे मना विश्व वानिकी दिवस

मिल्कीपुर -फैजाबाद।  वन  प्रभाग द्वारा कुमारगंज वन  चेतना केंद्र में विश्व वानिकी दिवस मनाया गया  जिसमें किसानों की आय को दूनी करने के लिए भारत सरकार की संस्था सीबार्ट द्वारा बांस आधारित उद्योगों से किसानों की आय में वृद्धि विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भी किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नरेन्द्रदेव कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज के कुलपति डा. जीत सिंह संधू, रहे उन्होंने कहा कि विश्व के  प्रदूषित पर्यावरण को शुद्ध करने में वनों का अद्वितीय एवं अप्रतिम योगदान है। वनों के सुप्रबंधन से जहां सतत प्राप्ति होने के साथ ही पर्यावरण संतुलन बनता है वहीं इसके गलत प्रबंधन से सम्पूर्ण मानव जीवन पर असर पड़ने की भी बात कुलपति ने कही। कुलपति जे०एस० संधू ने कहा  कि किसान की  आमदनी तीन  चीजों को अपनाने से दूनी हो सकती है  पहला  फसल से दूसरा  पशुपालन  से तथा तीसरा खेतों की मेंड़ पर पेंड लगाकर आमदनी बढाई जा सकती है  इसी क्रम में विश्वविद्यालय कुलपति जे०एस०संधू  व दिल्ली से आई सीबार्ट वैज्ञानिक के०रत्ना के  साथ में अन्य अधिकारी एवं वैज्ञानिको ने बांस के बनाए गए सामानों का  आलोकन भी किया।

प्रभागीय वनाधिकारी  फैजाबाद रविकुमार सिंह ने गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि वन की हिफाजत करना हम सब की जिम्मेदारी है, वन नष्ट होते हैं तो जल नष्ट होता है ,मत्स्य और जीवन नष्ट होता है फसले भी नष्ट होती है, उर्वरा विदा ले लेती है बाढ़ व आकाल आ जाता है ,इसलिए वनों को सुरक्षित रखना बहुत ही महत्वपूर्ण है।

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वहीं सीबार्ट दिल्ली से आई  वैज्ञानिकों की टीम ने मौजूद किसानों को बांस से बनने वाले सामानों की ट्रेनिंग दी  जिसमें कुर्सी ,मेज ,गुलद्स्ता, डलिया , बैग अंगूठी झबिया समेत कई वस्तुओं को बननने की विधि विस्तार पूर्वक बताई सीबार्ट  की वैज्ञानिक श्रीमती के रत्ना व ऋचा सिंह ने बांस लगाने की विधि से लेकर निकालने व बेंचने के बारे में किसानों को बताया तथा  बांस से  किसानों की  आमदनी कैसे बढेगी इसके लिए कुछ टिप्स भी दिये। किसान बांस की खेती करने से पहले भूमि तैयार करना चाहिए मध्यम व्यास की मोटी भित्ति वाली प्रजातियों के बांस  बैम्बूसा ,टुण्डा, न्यूटसं, डेण्ड्रोकेलेमस एस्टर तथा ब्राण्डिसाई के लिए उपयुक्त है। बांस के तनों की कटाई के लिए मानसून के बाद का समय जो शीतकाल तक चलता है वर्ष का सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है  ५ वे वर्ष से ही व्यवसायिक उपयोग के लिए बांस की कटाई शुरू किसान कर सकते हैं तने को किस उपयोग में लाना है या तय करने के लिए उसकी आयु एक महत्वपूर्ण कारक भी होता है  बांस के तनों की कटाई भूमि के ऊपर से कम से कम एक या दो पर्वसंधियों को छोड़कर  करने की जरूरत होती है।

इस मौके पर विश्वविद्यालय के रजिस्टार डा. पीके सिंह ,  वन क्षेत्राधिकारी  कुमारगंज एके श्रीवास्तव ,बीकापुर वन क्षेत्राधिकारी सत्यप्रकाश सिंह , अभिषेक राय , उप वन क्षेत्राधिकारी नंदकिशोर यादव, डॉ एचपी सिंह ,वन दरोगा रवि प्रसाद, दिलीप श्रीवास्तव, राम सुरेश पांडे ,जगत बहादुर  सिंह सहित क्षेत्रीय किसान गोष्ठी में मौजूद रहे।

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