निजी स्वार्थ के लिए महापुरूषों में विभेद अनुचित : प्रोे. कौशल किशोर

“पं0 दीन दयाल उपाध्याय का व्यक्तित्व एवं कृतित्व” विषय पर हुई संगोष्ठी

फैजाबाद। डाॅ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में पं0 दीन दयाल उपाध्याय की जयन्ती के अवसर पर “पं0 दीन दयाल उपाध्याय का व्यक्तित्व एवं कृतित्व” विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गयी। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रोे0 कौशल किशोर मिश्र ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पं0 दीन दयाल उपाध्याय की महत्ता बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि अपने निजी स्वार्थ के लिए महापुरूषों में विभेद नहीं करना चाहिए। पं0 नेहरू और पं0 दीन दयाल उपाध्याय के विचार, संस्कृति एवं सभ्यता में काॅफी अन्तर था। उन्होंने इस बात पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि डाॅ0 लोहिया के सिद्धान्तों पर आज तक कई शोध हुए है परन्तु पं0 दीन दयाल उपाध्याय के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर कोई शोध नहीं हुआ है। जिस दिन उनके सिद्धान्तों पर शोध होगा उस दिन पं0 दीन दयाल उपाध्याय और डाॅ0 लोहिया एक ही पंक्ति में खड़े होंगे। वेद की महत्ता का जिक्र करते हुए प्रोे0 मिश्र ने कहा कि वेदों का एक ही प्रमुख संदेश है कि लाखों हाथों से कमाओं और अरबों हाथों से बाटों। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का अर्थ अभावग्रस्त लोगों को सशक्त करना है और गांधी से लेकर दीनदयाल तक सभी विचारकों का यही दर्शन है। प्रो0 कौशल किशोर ने कहा कि भारत के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। अगर भारत को अपना दर्शन और मूल्यों को विश्व के समक्ष रखना है तो उसे भारतीय मूल्यों को भारत में उतारना होगा। दीन दयाल उपाध्याय का चिन्तन सुख के सिद्धान्त पर आधारित है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो0 राम लखन सिंह ने कहा कि विश्व-बन्धुत्व एवं अंत्योदय का सिद्धान्त पं0 दीन दयाल उपाध्याय ने रखा था। किसी भी कार्य का कुप्रभाव भी पड़ता है हमें उतना ही ग्रहण करना चाहिए जिससे हमारे जीवन का निर्माण हो सके। प्रो0 सिंह ने कहा कि हम जो भी धन अर्जित करते है उसका कुछ हिस्सा समाज के लिए अंशदान कर देना चाहिए। भारत की यही परम्परा रही है।
कार्यक्रम में पं0 दीन दयाल उपाध्याय शोधपीठ के समन्वयक प्रो0 आशुतोष सिन्हा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पं0 दीन दयाल शब्दों के जादूगर थे। पूंजीवाद समाजवाद केवल मन का ख्याल है हमें काम व धर्म पर अधिकार जमाना चाहिए। आज हमें दीन दयाल के चिन्तन को आत्मसात् करने की जरूरत है। कार्यक्रम का शुभारम्भ माॅ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गया।
संगोष्ठी को दो तकनीकी सत्रों में किया गया। प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता प्रो0 मृदुला मिश्रा ने कहा कि जहां तक पं0 दीन दयाल के व्यक्तित्व का सवाल है व व्यक्ति नही विचार थे हमें उनके विचारों को आत्म मथंन करने की जरूरत है। अध्यक्षता करते हुए मुख्य नियंता प्रो0 आर0एन0 राय ने कहा कि मानव संसाधन के विकास देश का विकास कर सकते है। पं0 दीन दयाल उपाध्याय का एकात्मवाद पुजीवाद से अलग है इसका एक मात्र उद्ेश्य हैं व्यक्ति निर्माण। द्वितीय सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता पुस्तकालयाध्यक्ष डाॅ0 आर0के0 सिंह ने कहा कि पं0 दीन दयाल के विचारों को आज जीवन में उतारने की जरूरत है। अध्यक्षता प्रो0 मृदुला मिश्रा ने कीे। तकनीकी सत्र का संचालन डाॅ0 प्रदीप त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर मीडिया प्रभारी प्रो0 के0 के0 वर्मा, प्रो0 अशोक शुक्ला, डाॅ0 सुन्दर लाल त्रिपाठी डाॅ0 शैलेन्द्र वर्मा, डाॅ0 शैलेन्द्र कुमार, डाॅ0 प्रिया कुमारी, डाॅ0 सुरेन्द्र मिश्र, डाॅ0 अलका मिश्रा, सरिता द्विवेदी, पल्लवी सोनी, रीमा राना सहित शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थिति रही।

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