पुण्यतिथि पर याद किये गये सरदार भगत सिंह

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    फैजाबाद। स्वतन्त्रता सेनानी सरदार भगत सिंह को 19वीं पुण्यतिथि पर उनके आवास मो. खिड़की अली बेग निकट गुरुद्वारा पुलिस लाईन में उन्हे श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुख्य अतिथि फैजाबाद बार एसोसिएशन के मंत्री आलोक खरे ने कहा कि यह हमलोगों के लिए गर्व का विषय है कि अवध की धरती पर उनका जन्म हुआ। मातृ भूमि की आजादी में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये दिनेश जायसवाल ने कहा कि उनके बगावती तेवर से अंग्रेज अफसर भी थर्राते थे। फैजाबाद की जमीं से स्वतंत्रता की अलख जगाने वाले सरदार भगत सिंह की आजादी की तड़प का अन्दाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होने अपने जवानी के दिनों में स्वतंत्रता आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन करते हुए भाजपा नगर उपाध्यक्ष अधिवक्ता राजीव कुमार शुक्ला ने कहा कि 10 मई 1999 को क्रांति दिवस के दिन उनका देहान्त उनके समर्पण की कहानी बयां करता है। शहीद स्मारक समिति के संयोजक ओम प्रकाश सिंह नाहर ने उनके जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुये कहा कि 9 अगस्त 1942 में अंग्रजों भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपने साथियों स्वतंत्रता सेनानी मन्नीलाल शुक्ल, बाबू चित्तबहाल सिंह, हुबराज सिंह व गंगा प्रसाद मिश्र जी के साथ जिला कारागार में डेढ़ वर्ष की सजा काटी व 150 रूपये का जुर्माना भी अदा करते हुए तमाम कठिनाइयां झेली। उनके नाती करमजीत सिंह ने कहा कि उनके स्वतंत्रता आंदोलनों में उनके योगदान के कारण 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व॰ श्रीमती इन्दिरा गांधी ने उन्हे लखनऊ में ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था। बाद में उन्होने अपना बाकी जीवन समाजसेवा को समर्पित किया। इनके पिताजी स्व॰ बाबा वरियाम सिंह गुरुद्वारा पुलिस लाइन मो॰ खिड़की अली बेग के संस्थापक थे व नहरबाग स्थित गुरुद्वारा स्थापना में भी इनका सक्रिय योगदान था। पुष्पांजलि व श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए प्रमुख रूप से सेनानी वंशज परिषद के सचिव मनोज मेहरोत्रा, करमजीत सिंह, जसविन्दर कौर, अमरजीत कौर, अधिवक्ता विमल श्रीवास्तव, इकबाल सिंह, भोला जायसवाल, समरप्रीत सिंह, जसप्रीत सिंह, गुरुतेज सिंह सहित तमाम लोग उपस्थित थे।